ब्रह्मचारिणी मां का दूसरा स्वरुप हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के इस प्रतिरूप की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के दूसरे दिन साधक का मन 'स्वाधिष्ठान' चक्र में स्थित होता है। इस मां चक्र में अवस्थित मन वाला साधक इनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। ब्रह्मचरिणी का स्वरुप पूर्ण ज्योतिर्मय है जिससे तीनों लोक प्रकाशवान है। उनके मुख पर दिव्य तेज है और उनके दायें हाथ में जप की माला है। उनके बायें हाथ में कमण्डल सुशोभित है। ये दोनों वस्तु उनके तपस्वी होने का संकेत देते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं, यानी तपस्या का मूर्तिमान स्वरूप हैं।
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पूजन विधि
देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा का विधान इस प्रकार है, सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओं एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमंत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें। उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें और उनका पूजन करें। देवी ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा का पूजन करें और वंदना श्लोक की स्तुति करें। सभी देवी देवताओं का आचमन करें व भोग लगाएं। इनके प्रसाद में मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं। प्रसाद के पश्चात पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। इनकी पूजा के दिन जातक को पीले-केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
वंदना मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु|
देवी प्रसीदतु मणि ब्रह्मचारिणी यनुत्तमा।।
ब्रह्मचारिणी उपासना स्तोत्र पाठ
तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
मां ब्रह्मचारिणी का ज्योतिष से संबंध
यदि जातक की कुंडली में मंगल यदि पीड़ित है या नीच अवस्था का है तो मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा करने से उसे बलिष्ठ किया जा सकता है। मंगल का संबंध प्रथम एवं आठवें भाव से होता है। अतः मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की बुद्धि, मानसिकता, आचरण, आयु, बुद्धिमत्ता आदि का विकास होता है। जिन व्यक्तियों कि कुण्डली में मंगल अस्त अथवा अंगारक योग बना रहा है अथवा कर्क राशि में आकर नीच एवं पीड़ित है, उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से धरती, जमीन-जायदाद, निवास आदि से संबंधित सभी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति से राहु की स्थिति को भी अनुकूल किया जा सकता है।
नवरात्रि के दूसरे दिन इस उपाय से होगा विशेष लाभ
यदि मां ब्रह्मचारिणी की अनुकम्पा आप पर पड़ी तो आपकी जमीन-जायदाद, निवास सम्बन्धी कोई भी परेशानी दूर हो जाएगी। जमीन-जायदाद से जुड़ी समस्याों को दूर करने के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन, जिस जमीन पर विवाद है, वहां सात छोटे-छोटे मिट्टी की डेली लेकर अपने पूजा स्थल पर विधि-विधान के साथ स्थापित कर मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति करनी है। इससे आपका कष्ट समाप्त हो जायेगा।