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नवरात्रि 2018 : माता की इस प्रिय चीज को चढ़ाने से मिलती है कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय

Thu, 11 Oct 2018 10:49 AM IST
डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक
डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक Updated Thu, 11 Oct 2018 10:49 AM IST
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navratri 2018 second day of navratri brahmacharini puja vidhi
navratri 2018

ब्रह्मचारिणी मां का दूसरा स्वरुप हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के इस प्रतिरूप की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के दूसरे दिन साधक का मन 'स्वाधिष्ठान' चक्र में स्थित होता है। इस मां चक्र में अवस्थित मन वाला साधक इनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। ब्रह्मचरिणी का स्वरुप पूर्ण ज्योतिर्मय है जिससे तीनों लोक प्रकाशवान है। उनके मुख पर दिव्य तेज है और उनके दायें हाथ में जप की माला है। उनके बायें हाथ में कमण्डल सुशोभित है। ये दोनों वस्तु उनके तपस्वी होने का संकेत देते हैं। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं, यानी तपस्या का मूर्तिमान स्वरूप हैं।



मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली देवी। मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई हजार वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। इस तपस्या के दौरान मां ब्रह्मचारिणी ने केवल फल-फूल का ही सेवन किया और निरंतर खुले आसमान के नीचे धूप और वर्षा के घोर कष्ट को सहते हुए भगवान शिव की आराधना करती रहीं। उन्होंने इस तपस्या  दौरान बेल-पत्रों का अत्यधिक सेवन किया जो कि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह आप से ही संभव थी। उनकी कठोर और अटल तपस्या से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। माता का यह दिव्य स्वरुप हमें यही संदेश देता है कि हमें कितनी भी कठिन मार्ग क्यों न हो अपने मन को विचलित नहीं होने देना चाहिए।

navratri 2018 second day of navratri brahmacharini puja vidhi

पूजन विधि
देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा का विधान इस प्रकार है, सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओं एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमंत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें। उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें और उनका पूजन करें। देवी ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा का पूजन करें और वंदना श्लोक की स्तुति करें।  सभी देवी देवताओं का आचमन करें व भोग लगाएं। इनके प्रसाद में मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं। प्रसाद के पश्चात पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। इनकी पूजा के दिन जातक को पीले-केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।

वंदना मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु|
देवी प्रसीदतु मणि ब्रह्मचारिणी यनुत्तमा।।

ब्रह्मचारिणी उपासना स्तोत्र पाठ
तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

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navratri 2018

मां ब्रह्मचारिणी का ज्योतिष से संबंध
यदि जातक की कुंडली में मंगल यदि पीड़ित है या नीच अवस्था का है तो मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा करने से उसे बलिष्ठ किया जा सकता है। मंगल का संबंध प्रथम एवं आठवें भाव से होता है। अतः मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की बुद्धि, मानसिकता, आचरण, आयु, बुद्धिमत्ता आदि का विकास होता है। जिन व्यक्तियों कि कुण्डली में मंगल अस्त अथवा अंगारक योग बना रहा है अथवा कर्क राशि में आकर नीच एवं पीड़ित है, उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से धरती, जमीन-जायदाद, निवास आदि से संबंधित सभी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति से राहु की स्थिति को भी अनुकूल किया जा सकता है।

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नवरात्रि के दूसरे दिन इस उपाय से होगा विशेष लाभ
यदि मां ब्रह्मचारिणी की अनुकम्पा आप पर पड़ी तो आपकी जमीन-जायदाद, निवास सम्बन्धी कोई भी परेशानी दूर हो जाएगी। जमीन-जायदाद से जुड़ी समस्याों को दूर करने के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन, जिस जमीन पर विवाद है, वहां सात छोटे-छोटे मिट्टी की डेली लेकर अपने पूजा स्थल पर विधि-विधान के साथ स्थापित कर मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति करनी है। इससे आपका कष्ट समाप्त हो जायेगा।

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