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नरक चतुर्दशी 2026: छोटी दिवाली पर नहीं करने चाहिए ये काम, जानें इस दिन यम दीप क्यों जलाया जाता है?

Tue, 03 Nov 2026 05:55 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Tue, 03 Nov 2026 05:55 PM IST
सार

Yam Deep 2026: नरक चतुर्दशी पर घर के बाहर यमदेव के निमित्त दीप प्रज्वलित करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि नरक चतुर्दशी पर यम दीप जलाने की परंपरा के पीछे क्या मान्यता है और इसका सही नियम क्या है।

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Narak Chaturdashi 2026 yam deep significance tradition rules chhoti diwali
छोटी दिवाली पर क्या करें, क्या न करें - फोटो : AI

Chhoti Diwali Par Kya Nahi Karna Chahiye: हिंदू पंचांग में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को बेहद खास माना जाता है। इस दिन नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। दीपावली से ठीक एक दिन पहले आने वाले इस त्योहार पर यमराज की पूजा करने और उनके नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक विश्वास है कि घर के बाहर यमदेव के निमित्त दीप प्रज्वलित करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि नरक चतुर्दशी पर यम दीप जलाने की परंपरा के पीछे क्या मान्यता है और इसका सही नियम क्या है।



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Narak Chaturdashi 2026 yam deep significance tradition rules chhoti diwali
यम दीप जलाने से जुड़ी धार्मिक मान्यता - फोटो : adobe stock

यम दीप जलाने से जुड़ी धार्मिक मान्यता
नरक चतुर्दशी के अवसर पर यमराज के नाम से दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक दीपदान करने से अकाल मृत्यु का संकट टलता है और यमदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दीप प्रज्वलित करते समय लोग अपने परिवार के सदस्यों की अच्छी सेहत, दीर्घायु और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। इसके साथ ही यमराज से नरक के कष्टों से बचाने और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने की कामना भी की जाती है। यह दीपक जीवन से अंधकार, नकारात्मकता और बुराइयों को दूर करने का प्रतीक भी है।

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नरक चतुर्दशी पर किन कामों से बचना चाहिए? - फोटो : adobe stock

नरक चतुर्दशी पर किन कामों से बचना चाहिए?
धार्मिक परंपराओं में नरक चतुर्दशी को यमराज की आराधना का दिन माना गया है। इसलिए इस दिन किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाने या उसकी हत्या करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यमदेव की दिशा दक्षिण है, इसलिए घर के दक्षिणी हिस्से को साफ-सुथरा रखना चाहिए। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तेल का दान नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की नाराजगी का भय रहता है। इसके अलावा, छोटी दिवाली पर तामसिक भोजन से परहेज करने की भी परंपरा है।

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छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व - फोटो : adobe stock

छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी असुर का अंत करके उसके आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इस घटना को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में याद किया जाता है और इसी वजह से पर्व को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। छोटी दिवाली के दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और उन्हें फूलों, दीपों तथा रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं। शाम के समय दीप जलाकर खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत किया जाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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