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Nag Panchami 2025: क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी? जानिए पूजा विधि और महत्व

Mon, 28 Jul 2025 01:20 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 28 Jul 2025 01:20 PM IST
सार

Nag Panchami Date: सावन मास की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नाग पंचमी, देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है। कुछ स्थानों पर यह पर्व शुक्ल पक्ष की पंचमी को तो कहीं कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाने की परंपरा है।

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Nag Panchami 2025 on July 29 Know the Religious Significance Worship Method and Shubh Muhurat
Nag Panchami 2025 - फोटो : adobe stock

Nag Panchami Kyon Manayi Jati Hai: नाग पंचमी का पर्व 29 जुलाई, मंगलवार को मनाया जाएगा। सावन मास की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नाग पंचमी, देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है। कुछ स्थानों पर यह पर्व शुक्ल पक्ष की पंचमी को तो कहीं कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाने की परंपरा है। इस दिन नाग देवता की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन सर्पों की आराधना करने से जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा होती है और कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष का प्रभाव भी कम होता है। यह पर्व सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से।


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Nag Panchami 2025 on July 29 Know the Religious Significance Worship Method and Shubh Muhurat
नाग पंचमी कब है - फोटो : adobe stock

नाग पंचमी कब है?
सावन पंचमी तिथि आरंभ –  28 जुलाई, रात्रि 11: 24 मिनट से
सावन पंचमी तिथि समाप्त – 30 जुलाई, प्रातः 12: 46 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 29 जुलाई, मंगलवार को मनाया जाएगा।

नाग पंचमी 2025 शुभ मुहूर्त
प्रातः  5:41 मिनट से प्रातः  8:23 मिनट तक

Nag Panchami 2025 on July 29 Know the Religious Significance Worship Method and Shubh Muhurat
क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी? - फोटो : adobe stock

क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी?
नाग पंचमी को लेकर कई प्राचीन पुराणों में कहानियां मिलती हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्द कथा महाभारत काल की है। उस समय राजा जनमेजय ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए नागों का संहार करने हेतु सर्प यज्ञ किया था। इस यज्ञ से नागों का विनाश होने लगा, तब उनकी मां उत्तरा की विनती पर आस्तिक मुनि ने नागों की रक्षा की। तभी से नागों का सम्मान करने और उनकी रक्षा के लिए नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाने लगा। यह दिन नागों को श्रद्धा और सम्मान देने का प्रतीक है, जब भक्त सर्पों को जल, दूध और अन्य वस्तुएं अर्पित करते हैं। साथ ही यह पर्व विष और दुर्भावनाओं से जीवन की रक्षा की कामना का भी प्रतिनिधित्व करता है। भले ही इसे सांपों की पूजा का दिन कहा जाता है, पर असल में यह त्योहार प्रकृति और जीवन की सुरक्षा का संदेश देता है।

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Nag Panchami 2025 on July 29 Know the Religious Significance Worship Method and Shubh Muhurat
नाग पंचमी के दिन की गई पूजा से राहु-केतु के कारण उत्पन्न अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। - फोटो : amar ujala

राहु-केतु का अशुभ प्रभाव होता है दूर
नाग पंचमी के पावन अवसर पर नाग देवताओं की पूजा-अर्चना करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। नाग देवता भगवान शिव के गणों में से एक माने जाते हैं। सावन मास में उनकी पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में मौजूद सभी प्रकार के दोष नष्ट हो जाते हैं। खासकर, नाग पंचमी के दिन की गई पूजा से राहु-केतु के कारण उत्पन्न अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि यह पर्व हर व्यक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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Nag Panchami 2025 on July 29 Know the Religious Significance Worship Method and Shubh Muhurat
पूजा के दौरान दूध में मिश्री या शहद मिलाकर नाग देवता को अर्पित करना शुभ माना जाता है। - फोटो : adobe stock

नाग पंचमी पूजन विधि

  • सबसे पहले, नाग पंचमी के दिन स्नान करके साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनना चाहिए।
  • इसके बाद घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर नाग देवता की तस्वीर या मिट्टी से बना हुआ चित्र स्थापित करें।
  • फिर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, दूध, जल, फूल और दूब से उनकी पूजा करें।
  • पूजा के दौरान दूध में मिश्री या शहद मिलाकर नाग देवता को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद ॐ नमः नागाय या ॐ नागेन्द्राय नमः जैसे मंत्रों का जाप करना चाहिए।
  • नाग पंचमी पर व्रत रखने की भी परंपरा है, खासकर विवाहित महिलाएं संतान सुख और परिवार की रक्षा के लिए यह उपवास रखती हैं।
  • पूजा समाप्त होने के बाद घर के आसपास मौजूद सांपों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
  • उनकी रक्षा के लिए दूध पिलाने की भी परंपरा निभाई जाती है, जिससे सर्प देवता की कृपा बनी रहती है।

 

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