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कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति? जानें इस पर्व के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्त्व
Sun, 05 Jan 2020 07:27 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Sun, 05 Jan 2020 07:27 AM IST
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मकर संक्रांति का पर्व जनवरी महीने में मनाया जाता है, यह पर्व महीने के चौदहवें या पंद्रहवें दिन आता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल मंगलवार 14 जनवरी की रात्रि में सूर्य उत्तरायण होंगे और बुधवार 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। आइए, अगली स्लाइड्स में जानते हैं इस पर्व का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
- मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।
बड़ा ही महत्व है इस माह का
- महाभारत के अनुशासन पर्व में माघ माह के स्नान,दान,उपवास और माधव पूजा का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इन दिनों में प्रयागराज में अनेक तीर्थों का समागम होता है इसलिए जो प्रयाग या अन्य पवित्र नदियों में भी भक्तिभाव से स्नान करते है वह तमाम पापों से मुक्त होकर स्वर्गलोक के अधिकारी हो जाते है । इस माह के महत्व पर तुलसीदासजी ने श्री रामचरित्रमानस के बालखण्ड में लिखा है-'माघ मकर गति रवि जब होई ,तीरथपतिहिं आव सब कोई !!'धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के दौरान मारे गए अपने रिश्तेदारों को सदगति दिलाने हेतु मार्कण्डेय ऋषि के सुझाव पर कल्पवास किया था। गौतमऋषि द्वारा शापित इंद्रदेव को भी माघ स्नान के कारण श्राप से मुक्ति मिली थी ।माघ मास में जो पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे एक विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है ,जिससे उसका शरीर निरोगी और आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न हो जाता है । माघ स्नान से शरीर के पाप जलकर भस्म हो जाते है ।इस मास में पूजन-अर्चन व स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है।
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मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व
- मकर संक्रांति के त्योहार में खिचड़ी, तिल और गुड़ से बनी मिठाई खाने का प्रचलन है। अब हम आपको इन सब के पीछे के वैज्ञानिक कारण बताने जा रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में चलने वाली सर्द हवाएं कई बीमारियों की कारण बन सकती हैं, इसलिए प्रसाद के तौर पर खिचड़ी, तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने का प्रचलन है। तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने से शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इन सभी चीजों के सेवन से शरीर के अंदर गर्मी भी बढ़ती है। अगली स्लाइड्स में जानिए इस महीने सेवन की जानी वाली खिचड़ी के फायदे।
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खिचड़ी के फायदे
- मकर संक्रांति के दिन प्रसाद के रूप में खाए जाने वाली खिचड़ी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। खिचड़ी से पाचन क्रिया सुचारु रूप से चलने लगती है। इसके अलावा आगर खिचड़ी मटर और अदरक मिलाकर बनाएं तो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है साथ ही बैक्टिरिया से भी लड़ने में मदद करती है।