Mahashivratri 2026: इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिव परिवार की पूजा-अर्चना करने से साधक को विशेष परिणाम प्राप्त होते हैं और उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि वास करती हैं। वहीं महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर के शिवालयों में भव्य पूजन का आयोजन भी किया जाता है। इस दौरान सभी शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक भी करते हैं, जिसका महत्व शास्त्रों में देखने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, जलाभिषेक की सही विधि जानते हैं ? अगर नहीं, तो आइए विस्तार से जान लेते हैं।
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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर कैसे करें जलाभिषेक ? जानें इसकी विधि और पूजा का समय
Sun, 15 Feb 2026 10:35 AM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Sun, 15 Feb 2026 10:35 AM IST
सार
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर व्रत, पूजा और अभिषेक का विशेष विधान बताया गया है। इससे देवों के देव महादेव प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।
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Mahashivratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
Mahashivratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2026
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:39 से 09:45
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - सुबह 12:52 से 03:59
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - सुबह 03:59 से 07:06
- निशिता काल पूजा समय - सुबह 12:28 से 01:17
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महाशिवरात्रि 2026
- फोटो : Amar Ujala
चार प्रहर की पूजा में मंत्र जाप
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
- प्रथम प्रहर का मंत्र- 'ह्रीं ईशानाय नमः'
- दूसरे प्रहर मंत्र- 'ह्रीं अघोराय नम:'
- तीसरे प्रहर मंत्र- 'ह्रीं वामदेवाय नमः'
- चौथे प्रहर मंत्र- 'ह्रीं सद्योजाताय नमः
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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Mahashivratri 2026
- फोटो : adobe
जलाभिषेक विधि
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
- महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए सबसे पहले शिवलिंग पर दूध, शक्कर, दही, शहद, घी और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- अब तांबे के लोटे में साफ जल लेकर उसे ऊँ नम: का जप करते हुए उसे चढ़ाएं।
- ध्यान रखें जल की धारा तेज नहीं बल्कि धीमी और पतली रहे।
- अब आप गंगाजल में काले तिल डालें और ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।' मंत्र का जाप करें।
- अब आप शिवलिंग पर इस गंगाजल को चढ़ाएं और प्रभु का नाम जप करें।
- शंकर जी को चंदन लगाएं और फिर 11 या 21 बेलपत्र अर्पित कर दें।
- शमी के फूल अर्पित करें व गेहूं भा चढ़ा दें।
- शिव परिवार को फूलों की माला अर्पित करें और दूर्वा चढ़ाएं।
- शिव जी के सामने आटे का चौमुखी दीपक जलाएं।
- शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
- आप सफेद चीजों का दान कर सकते हैं।
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