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Mahashivratri 2026: भद्रा योग में पड़ेगी महाशिवरात्रि, जानें शिव पूजन और जलाभिषेक का शुभ समय

Tue, 10 Feb 2026 02:20 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 10 Feb 2026 02:20 PM IST
सार

Mahashivratri Bhadra Kaal: महाशिवरात्रि के दिन भद्रा योग का निर्माण हो रहा है, जिसके कारण जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। भद्रा काल के समय शिव पूजन के नियमों को जानना जरूरी हो जाता है। इस दौरान यह समझना भी अहम है कि कब जलाभिषेक करना फलदायी रहेगा और किस समय भोलेनाथ की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।
 

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Mahashivratri 2026 Date & Muhurat Bhadra Kaal Effect Know the Dos and Donts of Shiva Worship disprj
महाशिवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala

Mahashivratri 2026 Kab Hai: महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं और भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई भक्ति से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।


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महाशिवरात्रि के दिन देशभर के शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। हर कोई शुभ मुहूर्त में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान का आशीर्वाद पाना चाहता है। लेकिन इस वर्ष महाशिवरात्रि पर भद्रा योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भद्रा काल का प्रभाव शिव पूजन और जलाभिषेक पर पड़ेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि भद्रा काल कब रहेगा और किस समय भोलेनाथ का जलाभिषेक करना शुभ माना जाएगा।
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Mahashivratri 2026 Date & Muhurat Bhadra Kaal Effect Know the Dos and Donts of Shiva Worship disprj
भद्रा काल का समय 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे से शुरू होगा। - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि 2026 भद्रा काल का समय
पंचांग के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा काल का समय 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे से शुरू होगा और 16 फरवरी की सुबह 05:23 बजे तक रहेगा। यानी इस बार महाशिवरात्रि के दौरान करीब 12 घंटे और 19 मिनट तक भद्रा काल बना रहेगा। भले ही भद्रा काल सुनने में थोड़ा अनिश्चित या अशुभ लग सकता है, लेकिन पंडितों और ज्योतिषियों के अनुसार इस बार भद्रा काल पाताल लोक में रहेगा।

शास्त्रों में बताया गया है कि जब भद्रा का प्रभाव पाताल लोक में होता है, तो उसका असर धरती पर नहीं पड़ता। इसलिए इस बार महाशिवरात्रि पर भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा कर सकते हैं, बिना किसी चिंता या असमंजस के।
 
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सुबह का पहला मुहूर्त 08:24 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। - फोटो : adobe

महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त 
इस साल महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं। सुबह का पहला मुहूर्त 08:24 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 09:48 बजे से 11:11 बजे तक है।
सबसे महत्वपूर्ण और अमृत मुहूर्त सुबह 11:11 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। इस समय में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना सबसे फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, शाम को भी एक शुभ-उत्तम मुहूर्त 06:11 बजे से 07:47 बजे तक रहेगा।
इन सभी समयों में भक्त भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं। यह समय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, और इन मुहूर्तों में की गई भक्ति का विशेष फल मिलता है।

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गंगाजल में काले तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक की विधि

महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा की तैयारी सुबह ही स्नान करके और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर शुरू करें। इसके बाद पूजा की सभी आवश्यक सामग्री जैसे दूध, दही, शहद, घी, शक्कर और गन्ने का रस एकत्रित कर लें।

अब शिवलिंग पर इन वस्तुओं का अभिषेक करें। जलाभिषेक करते समय ध्यान रखें कि जल की धारा पतली और धीरे-धीरे गिरे। कभी भी तेजी से जलाभिषेक न करें, क्योंकि शास्त्रों में इसे उचित नहीं माना गया है। इसके बाद गंगाजल में काले तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और इस जल को शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

इसके पश्चात भोलेनाथ को फल और फूल अर्पित करें। महादेव के समक्ष आटे का चौमुखी दीपक जला दें और धूपबत्ती भी प्रज्वलित करें। पूजा के क्रम में शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें। पूजा के दौरान यदि कोई भूल हो जाए तो क्षमा याचना अवश्य करें।

शिवलिंग पर जल अर्पित करने के दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण करना भी लाभकारी माना जाता है। उदाहरण के लिए,

शिवलिंग जल अर्पण मंत्र:

“मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्। तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि।”

इसके अलावा शक्तिशाली शिव मंत्रों का जप भी पूजा में ऊर्जा और सकारात्मक प्रभाव लाता है, जैसे:

ऐं ह्रीं श्रीं ‘ऊँ नमः शिवाय:’ श्रीं ह्रीं ऐं। ऊँ हौं जूं स:

इस प्रकार विधिवत पूजा और जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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