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Sawan Pradosh Vrat: आज शिववास योग में सावन का अंतिम प्रदोष व्रत, जानें मुहूर्त, पूजा विधि, लाभ और मंत्र

Wed, 06 Aug 2025 06:00 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 06 Aug 2025 06:00 AM IST
सार

Sawan Pradosh Vrat: इस बार 6 अगस्त को जो प्रदोष व्रत है, वह सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत होगा। इस दिन शिववास योग बन रहा है, जो भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।

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Last Pradosh Vrat of Sawan in Shivvas Yoga Auspicious Time Rituals Benefits and Mantras
इस बार 6 अगस्त को जो प्रदोष व्रत है, वह सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत होगा। - फोटो : अमर उजाला

Sawan Antim Pradosh Vrat: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत ही खास महत्व है। हर महीने में दो बार यह व्रत मनाया जाता है  एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है, और इस दिन शाम को उनकी विशेष पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष व्रत रखकर और प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। साथ ही, इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन की कई समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।



इस बार 6 अगस्त को जो प्रदोष व्रत है, वह सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत होगा। इस दिन शिववास योग बन रहा है, जो भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। आइये जानते हैं सावन प्रोद्श व्रत कि पूजा विधि, मंत्र, महत्त्व और भोग 
 

Last Pradosh Vrat of Sawan in Shivvas Yoga Auspicious Time Rituals Benefits and Mantras
इस दिन शाम 7:08 बजे से रात 9:16 बजे तक का समय प्रदोषकाल है - फोटो : adobe stock

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
श्रावण मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 अगस्त 2025 को दोपहर 2:08 बजे से शुरू होकर 7 अगस्त 2025 को दोपहर 2:27 बजे तक रहेगी। इसलिए इस साल श्रावण मास का तीसरा प्रदोष व्रत 6 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन शाम 7:08 बजे से रात 9:16 बजे तक का समय प्रदोषकाल है, जो महादेव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
 

Last Pradosh Vrat of Sawan in Shivvas Yoga Auspicious Time Rituals Benefits and Mantras
शिवजी और माता पार्वती की प्रतिमा या फोटो के सामने पूजा की थाली सजाएं। - फोटो : freepik

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें और स्वच्छ जल से स्नान करें। मन और शरीर को पूरी तरह शुद्ध करें।
  • शुद्ध मन से व्रत का संकल्प लें कि आप आज प्रदोष व्रत विधिपूर्वक करेंगे।
  • शिवजी और माता पार्वती की प्रतिमा या फोटो के सामने पूजा की थाली सजाएं।
  • इसमें बेलपत्र, चंदन, धतूरा, भांग, फल, फूल, अक्षत (चावल), जल, दीपक आदि रखें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक करें।
  • चंदन और जल से शिवलिंग का पूजन करें।
  • बेलपत्र अर्पित करें।
  • भांग, धतूरा और फल अर्पित करें।
  • शाम के प्रदोष काल (लगभग शाम 7:08 बजे से रात 9:16 बजे तक) में पूजा करें।
  • इस समय शिवजी की विशेष आराधना होती है।
  • प्रदोष व्रत की कथा सुनें या स्वयं पढ़ें। इससे व्रत का फल बढ़ता है।
  • पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • पूजा समाप्ति पर प्रसाद सभी को बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
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सावन प्रदोष व्रत के लाभ - फोटो : freepik

सावन प्रदोष व्रत के लाभ 

  • बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है।
  • करियर और व्यापार में सकारात्मक बदलाव आता है।
  • मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
  • वाणी में मधुरता आती है, संवाद कौशल बेहतर होता है।
  • पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलती है।
  • निर्णय क्षमता मजबूत होती है, भ्रम और असमंजस दूर होते हैं।
  • पारिवारिक और दांपत्य जीवन में शांति बनी रहती है।
  • रोग, शत्रु और कोर्ट-कचहरी जैसे मामलों में राहत मिलती है।
  • बुध दोष से संबंधित परेशानियां कम होती हैं।
  • भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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प्रदोष व्रत के मंत्र - फोटो : Instagram

प्रदोष व्रत के मंत्र 

शिव आरोग्य मंत्र
माम् भयात् सवतो रक्ष श्रियम् सर्वदा।
आरोग्य देही में देव देव, देव नमोस्तुते।।
ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव गायत्री मंत्र
ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।

शिव स्तुति मंत्र
द: स्वप्नदु: शकुन दुर्गतिदौर्मनस्य, दुर्भिक्षदुर्व्यसन दुस्सहदुर्यशांसि।
उत्पाततापविषभीतिमसद्रहार्ति, व्याधीश्चनाशयतुमे जगतातमीशः।।

शीघ्र विवाह के लिए मंत्र
ह्रीं गौर्य नमः
है गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरू कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्।।
हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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