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मंगला गौरी व्रत आज, इस तरह करें पूजा तो पति की होगी लंबी आयु

Tue, 06 Aug 2019 12:37 PM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत राय Updated Tue, 06 Aug 2019 12:37 PM IST
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know about mangla gauri vrat savan 2019
- फोटो : Social Media

मंगलवार को सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। ये सावन माह का तीसरा मंगलवार है। पुरानी मान्यताओं के मुताबिक सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति और संतान के अच्छे भविष्य की कामना करती हैं। आइए जानते हैं इस खास मौके पर किस तरह पूजा-पाठ करना चाहिए। 

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- फोटो : Social Media

पुरानी कथाओं के मुताबिक पुराने समय में धर्मपाल नाम का एक सेठ था। सेठ के पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी और सुंदर पत्नी भी थी पर उसका कोई संतान नहीं था। इसलिए सेठ हमेशा दुखी रहता था। काफी लंबे इंतजार के बाद भगवान की कृपा से उसकी पत्नी को एक बेटा हुआ। पुत्र के संबंध में ज्योतिषियों ने भविष्याणी की थी कि ये अल्पायु है और सोलहवें वर्ष में सांप के डसने से इसकी मृत्यु हो जाएगी। 

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- फोटो : Social Media

जब सेठ का बेटा बड़ा हुआ तो उसकी शादी एक ऐसी कन्या से हो गई जिसकी मां मंगला गौरी की व्रत करती थी। इस व्रत को करने वाली महिलाओं की पुत्री को आजीवन पति का सुख मिलता है। और वह हमेशा सुखी रहता है। इस व्रत के कारण सेठ धर्मपाल के बेटे को लंबी आयु मिली। 

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- फोटो : Social Media

मंगलवार, 6 अगस्त को सुबह जल्द उठें और व्रत करने का संकल्प लें। नहाने के बाद घर के मंदिर में भगवान के सामने कहें कि मैं पुत्र, पौत्र, सौभाग्य वृद्धि और श्री मंगला गौरी की कृपा प्राप्ति के लिए मंगला गौरी व्रत करने का संकल्प लेती हूं। इसके बाद मां मंगला गौरी यानी पार्वतीजी की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति को लाल कपड़े पर रखना चाहिए। इसके बाद आटे से बना दीपक घी भरकर जलाएं। पूजा, आरती करें। 

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ऊँ उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें। माता को हार-फूल, लड्डू, फल, पान, इलाइची, लौंग, सुपारी, सुहाग का सामान और मिठाई चढ़ाएं। मंगला गौरी की कथा सुनें। पूजा के बाद अन्य भक्तों को प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंद लोगों को धन-अनाज का दान करें। ध्यान रखें लगातार पांच साल तक मंगला गौरी पूजन करने के बाद पांचवें वर्ष में सावन माह के अंतिम मंगलवार को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए। तभी ये व्रत पूरा हो पाता है। मंगला गौरी व्रत में माता को 16 मालाएं, आटे के लड्डू, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और सुहाग सामग्री अर्पित करते हैं। इस दौरान मंगला गौरी माता की कथा सुनें। मंगला गौरी पूजा में 16 की संख्या का बहुत महत्व है, इसलिए पूजा में दीपक 16 बत्तियों वाला जलाना चाहिए। वहीं माता को 16 वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए।
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