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कालभैरव अष्टमी: जानिए क्यों कहते हैं काल भैरव को काशी का कोतवाल

Mon, 06 Nov 2017 03:24 PM IST
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 06 Nov 2017 03:24 PM IST
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kallbhairav astami: why kaal bhairav is called kashi ka kotwal

10 नवंबर दिन शुक्रवार को कालभैरव अष्टमी है। इस दिन भगवान काल भैरव का जन्म हुआ था। भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले बाबा कालभैरव का संबंध काशी से गहरा है। इन्हें काशी का कोतवाल कहते हैं और इनकी नियुक्ति स्वयं भगवान शंकर ने की थीं। ऐसी मान्यता है काशी में रहने वाला हर व्यक्ति को यहां पर रहने के लिए बाबा काल भैरव की आज्ञा लेनी पड़ती है। 



पढ़ें- कालभैरव अष्टमी: जानिए कैसे पैदा हुए काल भैरव और क्यों काट दिया था ब्रह्माजी का सिर

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ऐसी मान्यता है भगवान विश्वनाथ काशी के राजा हैं और काल भैरव इन प्राचीन नगरी के कोतवाल। इसी कारण से इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। इनका दर्शन किये वगैर विश्वनाथ का दर्शन अधूरा रहता है।

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बाबा काल भैरव के काशी के कोतवाल कहे जाने के पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है। शिवपुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में बड़ा कौन को लेकर विवाद पैदा हो गया। इसी बीच ब्रह्माजी ने भगवान शंकर की निंदा कर दी जिसके चलते भगवान शिव बहुत क्रोधित हो गए।

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भगवान शिव के क्रोध के कारण काल भैरव का जन्म हुआ और उन्होंने अपने नाखूनों से ब्रह्माजी का सिर काट दिया। जिसके कारण उनपर ब्रह्रा हत्या का पाप लगा।

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ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शंकर ने काल भैरव को पृथ्वी पर जाकर प्रायश्चित करने के लिए कहा, और बताया कि जब ब्रह्रमा जी का कटा हुआ सिर हाथ से गिर जाएगा उसी समय से ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। अंत में जाकर काशी में काल भैरव की यात्रा समाप्त हुई थी और फिर यहीं पर स्थापित हो गए और शहर के कोतवाल कहलाए।

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