Papmochani Ekadashi 2026: सभी एकादशी में पापमोचनी एकादशी को विशेष माना जाता है। इसके प्रभाव से साधक के पापों का नाश होता है और वह मोक्ष प्राप्त करता है। हिंदू धर्म में इस व्रत को विष्णु जी की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर यह उपवास किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के दुखों का अंत होता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ने लगती हैं। वर्तमान में चैत्र महीना जारी है। ऐसे में पापमोचनी एकादशी कब मनाई जाएगी, आइए इसके बारे में जानते हैं।
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Papmochani Ekadashi 2026: 14 या 15 मार्च कब है पापमोचनी एकादशी ? यहां जानें डेट और व्रत पारण का समय
Mon, 09 Mar 2026 01:03 PM IST
Megha Kumari
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Megha Kumari
Updated Mon, 09 Mar 2026 01:03 PM IST
सार
Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी का व्रत बहुत शुभ माना जाता है, जिसे चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन पूजा-पाठ व दान करने से साधक का भाग्योदय होता है।
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Papmochani Ekadashi 2026
- फोटो : अमर उजाला
Papmochani Ekadashi 2026
- फोटो : amar ujala
कब है पापमोचनी एकादशी 2026
- एकादशी तिथि का प्रारंभ 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर होगा।
- इस तिथि का समापन 15 मार्च को सुबह में 9 बजकर 16 मिनट पर होगा।
- उदया तिथि के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा।
- इस दिन श्रवण नक्षत्र और परिध योग का संयोग बना रहेगा।
- 16 मार्च को 9 बजकर 30 मिनट पर द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा।
Papmochani Ekadashi 2026
- फोटो : adobe stock
पापमोचनी एकादशी पूजा विधि
- पापमोचनी एकादशी की पूजा के लिए एक साफ चौकी पर विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- अब प्रभु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और साथ ही फूलों की माला भी पहनाएं।
- इसके बाद चौकी के पास साफ कलश में जल भरकर तुलसी दल डालें।
- इस दौरान एक सिक्का, बताशा और सुपारी भी लोटे में डालें और इसे विष्णु जी के पास रख दें।
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Papmochani Ekadashi 2026
- फोटो : adobe stock
- अब आप घी का दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद 'ॐ विष्णवे नमः' मंत्र का स्मरण करते हुए पंचामृत का भोग लगाएं।
- इस दौरान गुड़ और चना भोग के रूप में अर्पित अवश्य करें। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- अब आप विष्णु चालीसा का पाठ करें और आरती करते हुए पूजा का समापन करें।
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Papmochani Ekadashi 2026
- फोटो : adobe
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥