When Is Ugadi 2026: उगादी दक्षिण भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। इसे तेलुगु नववर्ष की शुरुआत के रूप में जाना जाता है। उगादी का त्योहार सुख-समृद्धि का प्रतीक है। उगादी के पर्व से चैत्र महीने की शुरुआत भी होती है। इस पर्व का श्रद्धालु पूरी परम्पराओं , भक्ति के साथ स्वागत करते हैं। उगादी का पर्व चंद्र पंचांग और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होता है। उगादी चैत्र महीने कि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। आइए जानते हैं उगादी के पर्व की सही तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व और अनुष्ठानों के बारे में।
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उगादी तिथि और समय
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 19 मार्च 2026, प्रातः 6:52 मिनट से
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि समाप्त-20 मार्च 2026, सायं 4:52 मिनट तक
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से तेलुगु शक संवत 1948 की शुरुआत होगी। यह दक्षिण भारत का पारम्परिक तेलुगु कैलेंडर है।
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उगादी का महत्व
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में उगादी पर्व धूम धाम से मानते हैं। इस पर्व का अध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। उगादी नाम दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है। इसमें युग का अर्थ है काल और आदि का अर्थ है आरम्भ। यानि उगादी एक ने युग की शुरुआत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी का जन्म हुआ तो उन्हें सृष्टि में अन्य कोई प्राणी नजर नहीं आया। उन्होंने हर स्थान पर खोजी की लेकिन कोई उद्देश्य न मिलने के कारण वह गहन ध्यान में लीन हो गये। सौर वर्षों की तपस्या के बाद उन्हें अपने दिव्य स्वरूप का ज्ञान हुआ और उन्होंने ब्रह्मांड की रचना की। कहते हैं इसी के परिणामस्वरुप उगादी को नयी शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
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उगादी कैसे मनाई जाती है
उगादी नए शुरुआत का प्रतीक है। बहुत से लोग सप्ताह भर पूर्व से ही इस पर्व की तैयारी करना आरम्भ कर देते हैं। घरों की साफ़-सफाई के साथ खरीदारी भी करते हैं। इस दिन लोग अपनी पसंद के कपड़े पहनते हैं और एक दूसरे को उगादी की शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन उगादी के पारम्परिक व्यंजन खाए जाते हैं। उगादी के दिन श्रद्धालु सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल से स्नान करते हैं। इसके बाद नए वस्त्र धारण करते हैं। घरों के सामने रंगोली बनायी जाती है। घर में फूल और आम के पत्तों के तोरण लगाए जाते हैं।
उगादी की खास परम्पराओं में से एक हैं पंचांग श्रवणम। इस अनुष्ठान में घर का कोई बुजुर्ग या कोई पुजारी वार्षिक पंचांग पढ़ते हैं। इन्हीं ज्योतिषीय गणना के आधार पर पूरे वर्ष कृषि, आर्थिक स्थिति और सुख समृद्धि का अनुमान लगाया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।