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भूत-पिशाच की योनी से मुक्ति दिलाने वाला है जया एकादशी का व्रत

Wed, 05 Feb 2020 01:27 PM IST
योगेश जोशी Jaya Ekadashi 2020: भूत-पिशाच की योनी से मुक्ति दिलाने वाला है जया एकादशी का व्रत
Jaya Ekadashi 2020: भूत-पिशाच की योनी से मुक्ति दिलाने वाला है जया एकादशी का व्रत Published by: योगेश जोशी Updated Wed, 05 Feb 2020 01:27 PM IST
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jaya ekadashi 2020 vrat benefits and importance
jaya ekadashi 2020

माघ महीना को पुराणों में बड़ा ही पुण्यदायी कहा गया है। इस महीने में स्नान, दान, व्रत का फल अन्य महीनों से अधिक बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार इस महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व तो ऐसा है कि जो व्यक्ति श्रद्धा पूर्वक इस व्रत को करता है उसे मृत्यु के बाद भूत-प्रेत नहीं बनना पड़ता है। इस एकादशी की कथा और महत्व के बारे में पुराणों में जो बातें कही गई हैं आप जानेंगे तो आप भी यह व्रत करेंगे। अगर आप व्रत नहीं कर पाते तो कुछ नियमों का पालन करके पुण्य के भागी बन सकते हैं। इस बार यह व्रत 05 फरवरी, बुधवार को है।

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धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है कि जया एकादशी का व्रत रखने वाला जाने अनजाने में हुए कई पापों से मुक्त हो जाता है। इस संदर्भ में एक कथा का उल्लेख पद्म पुराण में किया गया है कि इन्द्र की सभा में एक गंधर्व गीत गा रहा था। परन्तु उसका मन अपनी प्रिया को याद कर रहा था। इस कारण से गाते समय उसकी लय बिगड़ रही थी। इस पर इन्द्र ने क्रोधित होकर गंधर्व और उसकी पत्नी को पिशाच योनी में जन्म लेने का शाप दे दिया।

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पिशाच योनी में जन्म लेकर पति-पत्नी कष्ट भोग रहे थे। संयोगवश माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन दुखों से व्याकुल होकर इन दोनों ने कुछ भी नहीं खाया और रात में ठंढ की वजह से सो भी नहीं पाए। इस तरह अनजाने में इनसे जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के प्रभाव से दोनों शाप मुक्त हो गए और फिर से अपने वास्तविक स्वरूप में लौटकर स्वर्ग पहुंच गए।

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jaya ekadashi 2020 - फोटो : vishnu

देवराज इन्द्र ने स्वर्ग में जब गंधर्व को वापस इनके वास्तविक स्वरूप में देखा तो हैरान रह गए और इस चमत्कार के बारे में पूछा। गंधर्व और उनकी पत्नी ने बताया कि उनसे अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत हो गया। इस व्रत के पुण्य से ही उन्हें पिशाच योनी से मुक्ति मिली है।

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vishnu - फोटो : vishnu

शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत के दिन पवित्र मन से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। मन पर द्वेष, छल-कपट, काम और वासना की भावना को हावी नहीं होने देना चाहिए। नारायण स्तोत्र एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस प्रकार से जया एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और प्रेत योनी जाकर भटकने से मुक्ति मिलती है। 

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