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Kalashtami 2025: इस दिन रखा जाएगा मासिक कालाष्टमी व्रत, जानें शुभ योग, पूजा मुहूर्त और महत्व
Sat, 18 Jan 2025 10:02 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sat, 18 Jan 2025 10:02 PM IST
सार
वर्ष 2025 के पहले मासिक कालाष्टमी व्रत के दिन शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस बार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त...
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मासिक कालाष्टमी व्रत
- फोटो : Amar Ujala
Kalashtami 2025 Date: कालाष्टमी व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने में केवल एक बार आता है। इस दिन भक्त काल भैरव की आराधना करते हैं। काल भैरव को तंत्र और मंत्र के देवता के रूप में माना जाता है। उनकी पूजा से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है। वर्ष 2025 के पहले मासिक कालाष्टमी व्रत के दिन शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस बार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त...
मासिक कालाष्टमी पूजा मुहूर्त
- फोटो : freepik
मासिक कालाष्टमी पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 से 6:20 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दिन के 12:11 से 12:54 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 3:12 से 4:32 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 04:23 से शाम 06:11 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 से 6:20 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दिन के 12:11 से 12:54 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 3:12 से 4:32 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 04:23 से शाम 06:11 बजे तक
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योग और नक्षत्र
- फोटो : freepik
योग और नक्षत्र
व्रत के दिन धृति योग प्रातःकाल से शुरू होकर 22 जनवरी को सुबह 3:50 बजे तक रहेगा। इसके बाद शूल योग शुरू होगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र प्रातःकाल से रात 11:36 बजे तक रहेगा, जिसके बाद स्वाति नक्षत्र रहेगा।
व्रत के दिन धृति योग प्रातःकाल से शुरू होकर 22 जनवरी को सुबह 3:50 बजे तक रहेगा। इसके बाद शूल योग शुरू होगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र प्रातःकाल से रात 11:36 बजे तक रहेगा, जिसके बाद स्वाति नक्षत्र रहेगा।
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व्रत का धार्मिक महत्व
- फोटो : amar ujala
व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक कालाष्टमी व्रत रखने वाले भक्तों की महाकाल स्वयं रक्षा करते हैं। काल भैरव की कृपा से व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। उनकी उपासना करने से रोग, दोष, और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक कालाष्टमी व्रत रखने वाले भक्तों की महाकाल स्वयं रक्षा करते हैं। काल भैरव की कृपा से व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। उनकी उपासना करने से रोग, दोष, और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
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कालाष्टमी पूजा विधि
- फोटो : freepik
कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान काल भैरव की पूजा विधि में प्रातः स्नान और पूजा स्थल का शुद्धिकरण करने के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा में काल भैरव की मूर्ति या चित्र पर काले वस्त्र अर्पित कर, फूल, बेलपत्र, काले तिल, धूप, दीप और कपूर से पूजा करें। इसके बाद भैरव चालीसा का पाठ और "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान को मिष्ठान्न, पंचामृत और फल का भोग लगाकर आरती करें। इस दिन काले कुत्तों को रोटी या दूध खिलाना शुभ माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान देकर करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान काल भैरव की पूजा विधि में प्रातः स्नान और पूजा स्थल का शुद्धिकरण करने के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा में काल भैरव की मूर्ति या चित्र पर काले वस्त्र अर्पित कर, फूल, बेलपत्र, काले तिल, धूप, दीप और कपूर से पूजा करें। इसके बाद भैरव चालीसा का पाठ और "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान को मिष्ठान्न, पंचामृत और फल का भोग लगाकर आरती करें। इस दिन काले कुत्तों को रोटी या दूध खिलाना शुभ माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान देकर करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।