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Janmashtami Bhog Rules: जन्माष्टमी पर कितनी बार लगाना चाहिए बाल गोपाल को भोग? जानें सही नियम
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी बाल गोपाल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त उन्हें तरह-तरह के सात्विक पकवानों का भोग लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को कितनी बार भोग लगाना चाहिए? क्या छप्पन भोग लगाना जरूरी है और माखन-मिश्री का भोग क्यों खास माना जाता है? आइए जानते हैं बाल गोपाल को भोग लगाने से जुड़े प्रमुख नियम और परंपराएं।
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घर में नियमित रूप से बाल गोपाल की सेवा करने वाले भक्त उन्हें समय-समय पर भोजन अर्पित करते हैं।
- फोटो : amar ujala
नियमित सेवा में कितनी बार लगाएं भोग?
घर में नियमित रूप से बाल गोपाल की सेवा करने वाले भक्त उन्हें समय-समय पर भोजन अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपराओं में बाल स्वरूप की सेवा में भोजन को अलग-अलग समय पर अर्पित करने की रीति बताई गई है। कई घरों में बाल गोपाल को दिन में चार बार भोग लगाने की परंपरा का पालन किया जाता है।
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आधी रात को जन्मोत्सव और पूजा के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित करना विशेष माना जाता है।
- फोटो : instagram
जन्माष्टमी पर भोग का क्या है महत्व?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि यानी निशीथ काल में माना जाता है। इसलिए आधी रात को जन्मोत्सव और पूजा के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित करना विशेष माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान को भोग लगाते हैं।
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भोग में संख्या से अधिक श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है।
- फोटो : Adobe Stock
क्या जरूरी है छप्पन भोग लगाना?
जन्माष्टमी पर छप्पन भोग लगाने की परंपरा काफी प्रसिद्ध है। हालांकि हर घर में 56 तरह के पकवान बनाना आवश्यक नहीं माना जाता। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार एक या कुछ सात्विक व्यंजन भी श्रद्धा से भगवान को अर्पित कर सकते हैं। भोग में संख्या से अधिक श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है।
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बाल कृष्ण को माखन-मिश्री प्रिय मानी जाती है।
- फोटो : amar ujala
माखन-मिश्री का भोग क्यों खास?
बाल कृष्ण को माखन-मिश्री प्रिय मानी जाती है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के अवसर पर बाल गोपाल को माखन और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। भक्त इसे प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित करते हैं।
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