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बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ जन्माष्टमी पर क्यों होती है मंगला आरती? जानें रात 2 बजे दर्शन की परंपरा

Thu, 03 Sep 2026 10:19 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 03 Sep 2026 10:19 AM IST
सार

Banke Bihari Mangala Aarti: बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती साल में सिर्फ एक बार जन्माष्टमी के दिन होती है। आखिर इसके पीछे क्या खास परंपरा और मान्यता है? जानिए रात 2 बजे होने वाले विशेष दर्शन और मंगला आरती से जुड़ी रोचक बातें।

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Janmashtami at Banke Bihari Temple The Unique Tradition Behind Banke Bihari’s Rare Mangala Aarti
जन्माष्टमी 2026 - फोटो : amar ujala

Banke Bihari Mandir Mangla Aarti: वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण की अनोखी सेवा परंपराओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां ठाकुर जी को बाल स्वरूप में मानकर उनकी सेवा की जाती है। इसी वजह से मंदिर की दैनिक पूजा-पद्धति भी कई अन्य कृष्ण मंदिरों से अलग है। सबसे खास बात यह है कि बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती सामान्य दिनों में नहीं होती और साल में सिर्फ जन्माष्टमी के अवसर पर यह विशेष आरती की जाती है। जन्माष्टमी की रात मध्यरात्रि में महाभिषेक के बाद देर रात भक्तों को ठाकुर जी के विशेष दर्शन भी होते हैं। आखिर इसके पीछे क्या परंपरा है और जन्माष्टमी पर ही मंगला आरती क्यों की जाती है? आइए जानते हैं।

Janmashtami at Banke Bihari Temple The Unique Tradition Behind Banke Bihari’s Rare Mangala Aarti
बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती - फोटो : instagram

बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती क्या होती है?
मंगला आरती हिंदू मंदिर परंपरा में भगवान की दिन की पहली सेवा मानी जाती है। आमतौर पर यह आरती सुबह सूर्योदय से पहले भगवान को जगाने और उनकी आराधना करने के भाव से की जाती है। बांके बिहारी मंदिर की सेवा परंपरा में ठाकुर जी को बाल स्वरूप माना जाता है। इसलिए उनकी सेवा में बालक की तरह भोजन, विश्राम, श्रृंगार और जागरण जैसी भावनाओं को विशेष महत्व दिया जाता है।

Janmashtami at Banke Bihari Temple The Unique Tradition Behind Banke Bihari’s Rare Mangala Aarti
बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ एक बार मंगला आरती क्यों होती है? - फोटो : अमर उजाला

बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ एक बार मंगला आरती क्यों होती है?
इसके पीछे मंदिर की विशिष्ट सेवा परंपरा और ब्रज की धार्मिक मान्यताओं को प्रमुख कारण माना जाता है। सामान्य दिनों में ठाकुर जी को बहुत सुबह जगाकर मंगला आरती नहीं की जाती, क्योंकि उन्हें बाल स्वरूप में मानकर पर्याप्त विश्राम देने की परंपरा है। ब्रज की लोक आस्था में इसका संबंध निधिवन की रात्रिकालीन रासलीला की मान्यता से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि ठाकुर जी रात में निधिवन में रासलीला के लिए जाते हैं और देर रात वापस लौटकर विश्राम करते हैं। यह धार्मिक आस्था है, जिसका पालन भक्त श्रद्धा के साथ करते हैं।

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Janmashtami at Banke Bihari Temple The Unique Tradition Behind Banke Bihari’s Rare Mangala Aarti
जन्माष्टमी पर ही बांके बिहारी की मंगला आरती क्यों होती है? - फोटो : instagram

जन्माष्टमी पर ही बांके बिहारी की मंगला आरती क्यों होती है?

  • मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाया जाता है: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के समय विशेष पूजा और अभिषेक की परंपरा निभाई जाती है। इसी कारण मंदिर में रात के समय विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।
  • महाभिषेक के बाद विशेष दर्शन होते हैं: जन्माष्टमी की रात ठाकुर जी का महाभिषेक किए जाने की परंपरा है। इसके बाद विशेष श्रृंगार और सेवा के पश्चात भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था की जाती है।

  • मंगला आरती विशेष अवसर की सेवा है: जन्माष्टमी भगवान के जन्म का पर्व होने के कारण इस दिन देर रात के बाद होने वाली मंगला आरती को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वजह से भक्त इस दुर्लभ दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

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जन्माष्टमी की रात बांके बिहारी मंदिर में दर्शन कब होते हैं? - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

जन्माष्टमी की रात बांके बिहारी मंदिर में दर्शन कब होते हैं?
जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में अलग समय पर विशेष दर्शन की परंपरा होती है। उपलब्ध मंदिर संबंधी जानकारी के अनुसार, मध्यरात्रि में महाभिषेक के बाद करीब रात 2 बजे से विशेष दर्शन शुरू होते हैं और इसके बाद लगभग 3:30 बजे मंगला आरती की जाती है। समय में स्थानीय व्यवस्था या मंदिर प्रशासन के अनुसार बदलाव संभव है, इसलिए दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को आधिकारिक सूचना जरूर देखनी चाहिए।

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