Janmashtami 2022: महाभारत में हुए युद्ध की जानकारी सभी को होगी। महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध के बाद बहुत कुछ ऐसा हुआ जिस वजह से श्री कृष्ण को श्राप मिल और उनका सम्पूर्ण वंश समाप्त हो गया। कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था और इस दौरान 100 कौरव भाइयों समेत कई महारथी वीरगति को प्राप्त हुए थे। युद्ध के बाद कुछ ऐसा हुआ जिसने भगवान कृष्ण और यदु वंश का भविष्य बदल दिया। मान्यता है कि श्री कृष्ण को एक श्राप मिला था जिसके कारण उन्हें कुरक्षेत्र के युद्ध के 36 साल बाद धरती से मुक्ति मिली और कुछ वर्षों के बाद द्वारका शहर नष्ट हो गया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ। वहीं वेद व्यास द्वारा दी गई ज्योतिषीय जानकारी के अनुसार भगवान कृष्ण की मृत्यु 13 अप्रैल 3031 को हुई थी। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई और उनके वंश की समाप्ति कैसे हुई।
Janmashtami 2022: कब हुई भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु? जानिए कैसे समाप्त हुआ इनका वंश
जब गांधारी ने दिया श्री कृष्ण को श्राप
महाभारत के युद्ध के बाद गांधारी अपने पुत्रों की मृत्यु का शोक मना रही थी। गांधारी के अनुसार इस युद्ध के जिम्मेदार श्री कृष्ण थे। उनका मानना था कि यदि श्री कृष्ण चाहते तो ये युद्ध रोका जा सकता था। युद्ध के उपरांत जब भगवान कृष्ण द्वारका लौटने से पूर्व गांधारी से मिलने गए तब गांधारी उन पर बहुत कुपित हुईं। उन्होंने क्रोध में आकर श्री कृष्ण को श्राप दिया कि जिस प्रकार कुरुक्षेत्र के युद्ध में कुरु वंश का नाश हुआ वैसे ही श्रीकृष्ण के यदु वंश का भी नाश हो जाएगा। श्री कृष्ण दुखी मन से द्वारका लौट आए।
ऋषियों ने दिया श्री कृष्ण के पुत्र सांब को श्राप
एक दिन द्वारिका में महर्षि विश्वामित्र, कण्व और देवर्षि नारद पधारे। वहां पर कुछ युवा आए और उनके साथ परिहास करने लगे। वे परिहास करते समय अपनी मर्यादा तक भूल गए और श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को स्त्री वेष में ऋषियों के पास ले गए और कहा कि ये स्त्री गर्भवती है। इसके गर्भ से क्या उत्पन्न होगा? सभी ऋषि अंतर्यामी थे, उन्हें पता था कि वह श्री कृष्ण के पुत्र हैं। लेकिन क्रोध में आकर ऋषियों ने श्राप दिया कि- श्रीकृष्ण का यह पुत्र वृष्णि और अंधकवंशी पुरुषों का नाश करने के लिए एक लोहे का मूसल उत्पन्न करेगा। श्रीकृष्ण को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कहा कि ये बात अवश्य सत्य होगी।
द्वारका का पतन
ऋषि मुनियों के श्राप का प्रभाव इतना तीव्र था कि अगले दिन ही सांब ने मूसल उत्पन्न किया। द्वारका के राजा उग्रसेन ने उस मूसल को चूरा कर समुद्र में डलवा दिया और घोषणा करवाई कि आज से कोई भी नागरिक अपने घर में मदिरा तैयार नहीं करेगा। इसके बाद द्वारका पतन की ओर बढ़ने लगा। श्रीकृष्ण सब देख रहे थे। वह समझ चुके थे कि माता गांधारी का श्राप जल्द ही सत्य होने वाला है।
जब गांधारी का श्राप हुआ सच
एक बार सभी यदुवंशी महाभारत के युद्ध की चर्चा कर रहे थे, इसी दौरान सात्यकि और कृतवर्मा में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि सात्यकि ने कृतवर्मा का सिर काट दिया। इस घटना के बाद यदुवंशी समूहों में विभाजित हो गए और एक दूसरे के शत्रु हो गए। इस युद्ध में श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युमन समेत कई यदुवंशियों का विनाश हो गया। यदुवंश के नाश के बाद बलराम इतने दुखी हुए कि उन्होंने भी जल समाधि ले ली।