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Putrada Ekadashi 2020: पुत्रदा एकादशी का क्या है महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

Thu, 30 Jul 2020 07:09 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 30 Jul 2020 07:09 AM IST
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Putrada Ekadashi 2020: Importance of Putrada Ekadashi method of worship auspicious time
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत 2020(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Putrada Ekadashi 2020: पूरे वर्ष में कुल मिलाकर 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं। श्रावण मास में पड़ने वाली एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। सच्चे मन से यह व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है,जिन लोगों को किसी भी प्रकार की संतान संबंधी समस्या हो उन्हें यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। इस बार श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 जुलाई को पड़ रहा है। साल में दोबार पुत्रदा एकादशी आती है, दूसरी पुत्रदा एकादशी का व्रत पौष माह में पड़ता है। 

Putrada Ekadashi 2020: Importance of Putrada Ekadashi method of worship auspicious time
श्री हरि विष्णु

पुत्रदा एकादशी का महत्व 
पुत्रदा एकादशी व्रत करने से वाजपेयी यज्ञ के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है, जिन लोगों की संतान नहीं है उन लोगों के लिए यह व्रत बहुत शुभफलदायी होता है, भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। अगर संतान को किसी प्रकार का कष्ट है तो भी यह व्रत रखने से सारे कष्ट दूर होते हैं। संतान दीर्घायु होती है। जो लोग पूरी श्रद्धा के साथ पुत्रदा एकादशी व्रत के महत्व और कथा को पढ़ता या श्रवण करता है। उसे कई गायों के दान के बराबर फल की प्राप्ति होती है। समस्त पापों का नाश हो जाता है। 

Putrada Ekadashi 2020: Importance of Putrada Ekadashi method of worship auspicious time
श्री हरि विष्णु - फोटो : lord vishnu

पूजा करने का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि का आरंभ 30 जुलाई को 01:16 AM मिनट पर होगा।
एकादशी समाप्ति 30 जुलाई को 11:49 PM मिनट पर होगी।
व्रत के पारण का समय 31 जुलाई की सुबह को 05:42 बजे से 08:24 बजे तक रहेगा।  
पारण के दिन द्वादशी तिथि 10:42 PM पर समाप्त हो जाएगी।

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Putrada Ekadashi 2020: Importance of Putrada Ekadashi method of worship auspicious time
भगवान विष्णु - फोटो : Social media

एकादशी व्रत निर्जला किया जाता है लेकिन क्षमता के अनुसार इसे जल के साथ भी किया सकता है। संध्या के समय फलाहार कर सकते है। अगर आपको एकादशी का व्रत रखना है, तो दशमी तिथि से ही सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। एकदशी के दिन सुबह स्नानादि करके भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें। तत्पश्चात श्री हरि विष्णु की पूजा करें। एकदशी तिथि को पूर्ण रात्रि जाग कर भजन-कीर्तन और प्रभु का ध्यान करने का विधान है। द्वादशी तिथि को सूर्योदय के समय शुभ मुहूर्त में से विष्णु जी पूजा करके किसी भूखे व्यक्ति या ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। और दक्षिणा देनी चाहिए। उसके बाद व्रत का पारण करना चाहिए। व्रत में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन भी करना चाहिए। जानते हैं क्या है पूजा विधि..

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Putrada Ekadashi 2020: Importance of Putrada Ekadashi method of worship auspicious time
भगवान विष्णु

सुबह उठकर स्नानादि करके स्वचछ वस्त्र धारण करे और पूजाघर में श्री हरि विष्णु को प्रणाम करके उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। और व्रत का संकल्प करें। धूप-दीप दिखाएं और विधिवत विष्णु जी की पूजा करें, फलों, नैवेद्य से भोग लगाएं और अंत में आरती उतारें। विष्णु जी को तुलसी अति प्रिय है इसलिए उनकी पूजा में तुलसी का प्रयोग अवश्य करें। शाम के समय कथा पढ़े या सुनें। 

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