राखी का त्योहार सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह भाई बहन के बंधन को और भी ज्यादा मजबूत कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव जी की भी एक बहन थी। साथ ही अन्य देवताओं की बहनें भी थीं। रक्षाबंधन के खास मौके पर हम आपको बताएंगे ऐसी ही बहनों के बारें में जिनको शायद आप नहीं जानते होंगे।
Rakshabandhan 2020: भगवान शिव समेत इन देवताओं की बहनों के बारे में जानते हैं आप
शिव परिवार के बारे में सब जानते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि उनकी एक बहन भी थी। अब सवाल यह उठता है कि शिव तो अजन्मे हैं तो उनकी बहन कैसे उत्पन्न हुई। इसके साथ एक कथा जुड़ी है, कहा जाता है कि कैलाश पर्वत पर माता पार्वती को बहुत अकेला महसूस होता था। एक दिन वे अपने मन में विचार करने लगी कि अगर मेरी भी कोई ननद होती तो कितना अच्छा होता। अब शिव जी की माया को समझना तो मुश्किल है। उन्होंने पार्वती जी के मन की बात जान ली और अपनी माया से एक बहन को उत्पन्न किया लेकिन उनका आकार बहुत विचित्र था, उनका नाम आसवरी देवी था।
सौ भाईयों की एक बहन
महाभारत में धृष्टराज और गांधारी के 100 पुत्र थे जिसके कारण वे कौरव कहलाए। उनकी एक बहन भी थी, जिसका नाम दुशाला था। सिंध देश के राजा जयद्रथ के साथ दुशाला का विवाह हुआ था। जयद्रथ ने महाभारत में कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ा था। चक्रव्यहू के छः चरण भेदने के बाद सांतवें चरण में अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु पर जयद्रथ ने पीछे से वार करके उसकी हत्या कर दी थी।
राजा बलि की धर्म बहन
राजा बलि ने एक बार यज्ञ किया तो भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके बालि से तीन पग भूमि दान में मांगी, बालि में सोचा की तीन पग में ये छोटा सा ब्राह्मण कितनी भूमि नाप लेगा उन्होंने तीन पग भूमि दान कर दी लेकिन देखते ही देखते वामन अवतार धारण किए हुए विष्णु जी ने सब कुछ नाप लिया और राजा बलि के रहने के लिए पाताल लोक दे दिया लेकिन बलि ने उनसे वरदान मांगा कि वे हर समय प्रभु के अपने सामने देखना चाहते हैं।
इस वरदान के कारण विष्णु जी पाताल लोक में बलि के पहरेदार बन कर रहने लगे। तब लक्ष्मी जी ने अपने स्वामी के वापस लाने के लिए एक साधारण स्त्री का रुप धारण किया और रोते हुए पाताल लोक पहुंच गई। बलि ने उनके रोने का कारण पूछा को उन्होंने कहा कि उनका भाई नहीं है। इस पर राजा बालि ने लक्ष्मी जी को अपनी बहन मान लिया। कहते है कि तभी से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा।
यम की बहन
यमराज की बहन यमुना है। एकबार यमुना जी ने अपने भाई यम को आमंत्रित किया। जब यम अपनी बहन से मिलने पहुंचे तो उन्होंने भाव विभोर होकर अपने भाई को भोजन करवाया। इसके बाद प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो यमुना जी ने वरदान मांगा कि मेरे जल में स्नान करने वाला व्यक्ति कभी भी यमलोक न जाए लेकिन यमराज जी ने सोचा कि इस तरह से तो यमलोक का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। तब यमुना जी ने कहा कि आप चिंता न करें। आप वरदान दें कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करेगा और मेरे जल में स्नान करेगा उसे यमलोक नहीं जाना पड़ेगा। तभी से यमद्वितीया का त्योहार मनाया जाने लगा। इस दिन भाई अपनी बहन के यहां जाकर भोजन करते हैं और यमुना जी में स्नान करते हैं।