Holika Dahan ke Niyam: होली का पर्व हर साल फाल्गुन मास की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग रंग-बिरंगे रंगों से खेलते हैं। तो वहीं इससे पहले होलिका दहन पूजा की परंपरा है, जो इस मास की पूर्णिमा तिथि को संपन्न की जाती है। इस बार 7 मार्च को होलिका दहन व 8 मार्च, यानि इसके ठीक अगले दिन होली का मनाई जाएगी। होलिका दहन अनुष्ठान करने और प्रार्थना करने के लिए अलाव के चारों ओर इकट्ठा होकर चिह्नित करते हैं। यह परंपरा हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रहलाद, भगवान विष्णु के भक्त और उसकी राक्षसी चाची होलिका से जुड़ी हुई है। इस तरह होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। प्रतिपदा तिथि पर रंगों और गुलाल से होली खेली जाती है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन भद्रा रहित पूर्णिमा की रात को मनाना उत्तम होता है। इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान भी रखा जाता है। कुछ लोगों को होलिका दहन के दिन होलिका की अग्नि को नहीं देखना चाहिए अन्यथा उन्हें हानि हो सकती है।
Holika Dahan 2023 : इन लोगों को गलती से भी नहीं देखना चाहिए होलिका दहन, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
इन लोगों को नहीं देखनी चाहिए होलिका की अग्नि
हिंदु मान्यताओं के अनुसार नवविवाहित स्त्रियों को जलती हुई होलिका नहीं देखनी चाहिए। इसके अलावा जो स्त्रियां गर्भवती हैं उन्हें होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है।
क्यों नहीं देखनी चाहिए होलिका?
नवविवाहित स्त्रियों को जलती हुई होलिका की अग्नि न देखने के पीछे एक विशेष कारण हैं। इससे जुडे तथ्य के अनुसार होलिका की अग्नि को लेकर माना जाता है कि आप पुराने साल को जला रहे हैं, अर्थ आप अपने पुराने साल को स्वयं जला रहे हों।। होलिका की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवविवाहित स्त्रियों को होलिका की जलती हुई अग्नि को देखने से बचना चाहिए।
होलिका दहन तिथि
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि आरंभ: 6 मार्च 2023, सोमवार, सायं 04:18 मिनट से
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि समाप्त:7 मार्च 2023 मंगलवार, सायं 06:10 मिनट तक
उदयातिथि के अनुसार होलिका दहन का त्योहार 7 मार्च को ही मनाया जाएगा
होलिका दहन 2023 मुहूर्त
होलिका दहन के लिए 7 मार्च को सायं 06.31 से रात्रि 08.58 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। इस बार होलिका दहन के लिए 02 घंटे 07 मिनट तक का समय मिलेगा।