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Holashtak 2023: जानिए क्या है होली से पहले होलाष्टक का धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व

Sat, 25 Feb 2023 01:33 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 25 Feb 2023 01:33 PM IST
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Holashtak 2023 Rules and Impotance before 8 Days of Holika Dahan
Holashtak 2023:
धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक कहा गया है। इस वर्ष 27 फरवरी, सोमवार से होलाष्टक शुरू हो रहे हैं। होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पूर्व होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखी लकड़ी,उपले व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है। इसी दिन को होलाष्टक प्रारम्भ का दिन माना जाता है। होलाष्टक के दौरान विवाह,गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण एवं विद्यारंभ आदि सभी मांगलिक कार्य या कोई नवीन कार्य प्रारम्भ करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है। होलाष्टक के आठ दिन  क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य,आइए जानते हैं।
Holashtak 2023 Rules and Impotance before 8 Days of Holika Dahan
Holashtak 2023: - फोटो : istock
धार्मिक मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार,फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को कामदेव ने महादेव की तपस्या भंग की थी। इससे क्रोधित होकर शिवजी ने कामदेव को भस्म कर दिया था। प्रेम के देवता कामदेव के भस्म होते ही सारी सृष्टि में शोक से व्याकुल व्याप्त हो गया। अपने पति को पुनः जीवित करने के लिए रति ने अन्य देवी-देवताओं सहित शिवजी से अनुनय-विनय की। प्रसन्न होकर भोले शंकर ने कामदेव को पुर्नजीवन का आशीर्वाद दिया। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को कामदेव भस्म हुए और आठ दिन बाद महादेव से रति को उनके पुर्नजीवन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
Holashtak 2023 Rules and Impotance before 8 Days of Holika Dahan
holika dahan - फोटो : amar ujala
एक अन्य कथा के अनुसार उधर प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से नाराज़ उसके पिता राजा हिरण्यकश्यप ने इन आठ दिनों में उनको कठिन यातनाएं दी। पूर्णिमा के दिन हिरण्यकश्यप ने बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था) के साथ प्रह्लाद को जला दिया। लेकिन प्रह्लाद ईश्वर कृपा से बच गए और होलिका जल गई। भक्ति पर आघात की इसी अवधि को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है।
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Holashtak 2023 Rules and Impotance before 8 Days of Holika Dahan
होलिका दहन - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष मान्यता
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक नवग्रह भी उग्र रूप लिए रहते हैं ,यही वजह है कि इस अवधि में किए जाने वाले शुभ कार्यों में अमंगल होने की आशंका बनी रहती है। होलाष्टक में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं एवं नकारात्मकता की अधिकता रहती है। इसका असर व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता पर भी पड़ता है।
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Holashtak 2023 Rules and Impotance before 8 Days of Holika Dahan
हलिका दहन - फोटो : अमर उजाला

होलाष्टक का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
होलाष्टक की परंपरा के पीछे सिर्फ धार्मिक कारण ही नहीं है बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। इनके अनुसार होलाष्टक का विज्ञान प्रकृति और मौसम के बदलाव से जुड़ा हुआ है। इन दिनों वातावरण में बैक्टीरिया वायरस अधिक सक्रिय होते हैं। सर्दी से गर्मी की ओर जाते इस मौसम में शरीर पर सूर्य की पराबैगनी किरणें विपरीत प्रभाव डालती हैं।होलिका दहन पर जो अग्नि निकलती है वो शरीर के साथ साथ आसपास के बैक्टीरिया और नकारात्मक ऊर्जा काेे समाप्त कर देती है। क्योंकि गाय के गोबर से बने कंडे, पीपल, पलाश, नीम और अन्य पेड़ों की लकड़ियों से होलिका दहन होने पर निकलने वाला धुंआ सेहत के लिए अच्छा होता है। इसलिए होलाष्टक के दिनों में उचित खान-पान की सलाह दी जाती है। 

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