फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

holi 2021: होलिका दहन के अगले दिन को क्यों कहा जाता है धुलेंडी

Fri, 19 Mar 2021 07:39 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 19 Mar 2021 07:39 AM IST
विज्ञापन
Holi 2021 Dhulandi Why is the next day of Holika Dahan called Dhulendi
होली 2021 - फोटो : istock

होली का त्योहार पूरे भारतवर्ष में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। लोग एक दूसरे पर अबीर गुलाल और रंग डालते हैं। यह त्योहार उमंग और उल्लास को दर्शाता है। प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को रंग वाली होली मनाई जाती है। इस बार 28 मार्च 2021 को होलिक दहन किया जाएगा और 29 मार्च 2021 को होली का पर्व मनाया जाएगा। जिसे रंग वाली होली या धुलेंडी कहा जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि रंग वाली होली को धुलेंडी क्यों कहते हैं, और यह परंपरा कब से शुरू हुई।

Holi 2021 Dhulandi Why is the next day of Holika Dahan called Dhulendi
होली 2021 - फोटो : istock

होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी मनाई जाती है। इस दिन लोग जमकर पानी और रंगो से होली खेलते हैं। धुलेंडी को धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन और चैत बदी आदि नामों से जाना जाता है। आज के समय में धुलेंडी का त्योहार एक दूसरे पर रंग और अबीर गुलाल डालकर मनाया जाता है, लेकिन पहले के समय में धुलेंडी का त्योहार बहुत ही अलग तरह से मनाया जाता था। उसी पंरपरा के नाम पर इस दिन को धुलेंडी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग के आरंभ में भगवान विष्णु धूलि वंदन किया था। तभी से इस दिन धूलिवंदन यानि एक दूसरे पर धूल लगाने की पंरपरा शुरू हुई। एक दूसरे पर धूल लगाने के कारण ही इस दिन को धुलेंडी कहा जाता है।
 

Holi 2021 Dhulandi Why is the next day of Holika Dahan called Dhulendi
होली 2021 - फोटो : अमर उजाला

पुराने समय में लोग जब एक दूसरे पर धूल  लगाते थे तो उसे धूलि स्नान कहा जाता था। आज भी कुछ जगहों पर खासतौर पर गांवो में लोग एक दूसरे धूल आदि लगाते हैं। पहले के समय में लोग शरीर पर चिकनी या मुल्तानी मिट्टी भी लगाया करते थे। इसके अलावा पहले के समय में इस दिन धूल के साथ टेसू के फूलों के रस से बने हुए रंग का उपयोग किया जाता था और रंगपंचमी पर अबीर गुलाल से होली खेली जाती थी। वर्तमान समय में धुलेंडी का रूप बदल गया है, लोग इस दिन भी रंगपंचमी के उत्सव की तरह ही रंगों से उत्सव मनाते हैं। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Holi 2021 Dhulandi Why is the next day of Holika Dahan called Dhulendi
होली 2021
पहले धुलेंडी के दिन सूखा रंग केवल उन घरों में डालने की पंरपरा थी, जिन घरों में विगत वर्ष किसी की मृत्यु हुई हो। आज भी लोग धुलेंडी पर उन लोगों के घर मिलने जाते हैं और गुलाल से टीका लगाकर होली (धुलेंडी) की परंपरा का निर्वहन करते हैं। 

 
विज्ञापन
Holi 2021 Dhulandi Why is the next day of Holika Dahan called Dhulendi
होली 2021
धुलेंडी पर क्यों है गले मिलने की पंरपरा
इस विषय में कहा जाता है कि जब भक्त प्रहलाद को मारने के सभी प्रयास निष्फल हो गए तो हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से सहायता मांगी। होलिका को अग्नि में न जलने के वरदान प्राप्त था। वह अपने भतीजे प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन विष्णु जी की कृपा से भक्त प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ और होलिक अग्नि में जलकर भस्म हो गई। कहा जाता है कि भक्त प्रहलाद के बचने की खुशी में लोग एक दूसरे के गले मिले और मिठाइयां बांटी। इसके अलावा एक दूसरे से गले मिलने की परंपरा भाई चारे (मिलजुलकर रहने) का संदेश देती है। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed