Chaitra Navratri 2020: कन्या पूजन में कन्याओं के साथ बालक को भी कराना चाहिए भोजन, मिलता है मनवाछिंत फल
कन्या सृष्टि सृजन श्रंखला का अंकुर होती हैं ये पृथ्वी पर प्रकृति स्वरुप मां शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं जैसे सांस लिए बगैर आत्मा नहीं रह सकती वैसे ही कन्याओं के बिना इस सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कन्या प्रकृति रूप ही हैं अतः वह सम्पूर्ण है। मार्कन्डेय पुराण के अनुसार सृष्टि सृजन में शक्ति रूपी नौ दुर्गा, व्यस्थापाक रूपी नौ ग्रह, चारों पुरुषार्थ दिलाने वाली नौ प्रकार की भक्ति ही संसार संचालन में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
- नवरात्रि में नौ कन्या का महत्व
दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि "कुमारीं पूजयित्या तू ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम्" अर्थात दुर्गापूजन से पहले कुवांरी कन्या का पूजन करने के पश्चात ही मां दुर्गा का पूजन करें। भक्तिभाव से की गई एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो कन्या की पूजा से भोग, तीन की चारों पुरुषार्थ, और राज्यसम्मान, पांच की पूजा से बुद्धि-विद्या, छ वर्ष की पूजा से कार्यसिद्धि, सात की पूजा से परमपद, आठ की पूजा से अष्टलक्ष्मी और नौ कन्या की पूजा से सभी एश्वर्य की प्राप्ति होती है।
- पुराण के अनुसार इनके ध्यान और मंत्र इस प्रकार हैं
मंत्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्। नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्।।
जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरुपिणि । पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोस्तु ते।।
!! कुमार्य्यै नम:, त्रिमूर्त्यै नम:, कल्याण्यै नमं:, रोहिण्यै नम:, कालिकायै नम:, चण्डिकायै नम:, शाम्भव्यै नम:, दुगायै नम:, सुभद्रायै नम: !!
- कन्याओं का पूजन करते समय पहले उनके पैर धुलें पुनः पंचोपचार विधि से पूजन करें और बाद में सुमधुर भोजन कराएं और प्रदक्षिणा करते हुए यथा शक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें। इस तरह नवरात्रि पर्व पर कन्या का पूजन करके भक्त मां की कृपा पा सकते हैं।