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अखंड दीपक: दिवाली की रात क्यों जलाया जाता है अखंड दीपक? जानिए इस ज्योति का महत्व और बुझने का संकेत

Sat, 07 Nov 2026 01:14 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Sat, 07 Nov 2026 01:14 PM IST
सार

Diwali par diya kyon jalate hain: हिंदू धर्म में दीपक को केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान, आस्था और मंगल का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि कई घरों में दिवाली की रात पूजा के दीपक को लगातार जलाए रखने की मान्यता प्रचलित है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या धार्मिक कारण बताए जाते हैं।

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Diwali Puja deepak ratbhar jalane ki dharmik manyata Akhand Deepak jalane ki parampara
दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा का दीपक रातभर जलाने की क्यों है परंपरा? - फोटो : AI

Diwali Akhand Deepak Significance: दीपावली का पर्व दीपों की जगमगाहट और खुशियों के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर अंधकार को दूर करने और सकारात्मकता का स्वागत करने की परंपरा है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के दौरान भी दीप प्रज्वलित किया जाता है। हिंदू धर्म में दीपक को केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान, आस्था और मंगल का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि कई घरों में दिवाली की रात पूजा के दीपक को लगातार जलाए रखने की मान्यता प्रचलित है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या धार्मिक कारण बताए जाते हैं।

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Diwali Puja deepak ratbhar jalane ki dharmik manyata Akhand Deepak jalane ki parampara
पूजा का दीपक बुझना क्यों माना जाता है अशुभ? - फोटो : adobe stock

पूजा का दीपक बुझना क्यों माना जाता है अशुभ?
हिंदू धर्म में अग्नि और प्रकाश को पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है। दीपक की लौ अज्ञानता और नकारात्मकता को दूर कर ज्ञान तथा सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है। दीपावली पर जलाया गया दीपक घर में सुख-शांति और शुभता के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के चलते कुछ परिवारों में पूजा के दौरान प्रज्वलित दीपक को रातभर जलाए रखने की परंपरा है। हालांकि, दीपक अचानक बुझ जाए तो इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह अक्सर हवा, तेल या बाती की कमी जैसे सामान्य कारणों से भी हो सकता है।
 

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मां लक्ष्मी की पूजा से क्या है दीपक का संबंध? - फोटो : adobe stock

मां लक्ष्मी की पूजा से क्या है दीपक का संबंध?
दीपावली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन दीपों से सजे घर में मां लक्ष्मी का स्वागत होता है। भक्त मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाकर अपने घर को प्रकाशमय बनाते हैं। धार्मिक दृष्टि से दीपक की रोशनी समृद्धि, खुशहाली और शुभता का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि लक्ष्मी पूजन में दीप प्रज्वलित करने को विशेष महत्व दिया जाता है।
 

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क्या है अखंड दीपक जलाने की परंपरा? - फोटो : adobe stock

क्या है अखंड दीपक जलाने की परंपरा?
दीपावली की पूजा में कई परिवार अखंड दीपक जलाने का संकल्प लेते हैं। अखंड दीपक का अर्थ है ऐसा दीपक, जिसे एक निश्चित अवधि तक लगातार प्रज्वलित रखा जाए। इसे अटूट श्रद्धा, समर्पण और भक्ति भाव का प्रतीक माना जाता है। कुछ घरों में इसे पूरी रात जलाया जाता है, जबकि कुछ परिवार अपनी परंपरा और पूजा-विधि के अनुसार इसे निर्धारित समय तक प्रज्वलित रखते हैं। इसके लिए घी या तिल के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
 

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दीपक जलाने के पीछे छिपा है खास संदेश - फोटो : adobe stock

दीपक जलाने के पीछे छिपा है खास संदेश
दीपक की छोटी-सी लौ भी अंधेरे में उजाला फैलाने की क्षमता रखती है। इसका आध्यात्मिक संदेश है कि जीवन में मुश्किलें कितनी भी हों, उम्मीद और ज्ञान का प्रकाश हमेशा बनाए रखना चाहिए। दीपावली पर दीपक जलाने की परंपरा भी इसी विचार को दर्शाती है। हालांकि, अखंड दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसे समतल और सुरक्षित जगह पर रखें तथा पर्दों, कागज और अन्य ज्वलनशील चीजों से दूर रखें। दीपक को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी दूर रखना चाहिए।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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