दिवाली से ठीक एक दिन पहले नरक चतुर्दशी आती है। इसे रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन का सबसे बड़ा महत्व पितरों और यमराज से संबंधित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इस दिन नरकासुर का वध करके बंदी बनाई गई 16 हजार कन्याओं को मुक्त करवाया था। इन कन्याओं के अनुरोध पर श्री कृष्ण ने इन सभी से विवाह करके अपनी पत्नी का दर्जा दिया। नरकासुर का वध करने में रुक्मिणी ने भी श्रीकृष्ण की सहायता की थी, इसलिए इस चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है।
नरक चतुर्दशीः चारमुखी दीपक में सिक्के के साथ डालें ये खास चीज,धन की होने लगेगी बारिश
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
Updated Wed, 18 Oct 2017 12:24 PM IST
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