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Dhanteras 2025: धनतेरस पर यम दीपक जलाने से टलती है अकाल मृत्यु, जानें पूरी विधि और मंत्र

Thu, 16 Oct 2025 12:20 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 16 Oct 2025 12:20 PM IST
सार

Yama Deepak Significance: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ शुभ वस्तुओं की खरीदारी की जाती है। इस दिन यमराज के नाम का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु और दुर्भाग्य से रक्षा होती है।
 

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Dhanteras 2025 Yam Deepak Jalane Ke Niyam Puja Vidhi and Mantra in Hindi
dhanteras 2025 - फोटो : amar ujala

Yama Deepak Vidhi and mantra: धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन मुख्य रूप से धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। साथ ही, लोग इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं, ताकि पूरे वर्ष घर में बरकत बनी रहे। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस की खरीदारी से सुख-समृद्धि में कई गुना वृद्धि होती है।


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धनतेरस की शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी खास परंपरा है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से यमदेव प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। यह दीपदान न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक रूप से भी शांति और सुरक्षा का एहसास कराता है। इसलिए धनतेरस पर पूजा और खरीदारी के साथ-साथ यमराज को दीपक अर्पित करना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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Dhanteras 2025 Yam Deepak Jalane Ke Niyam Puja Vidhi and Mantra in Hindi
धनतेरस 18 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी और इसी दिन शाम के समय यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। - फोटो : freepik

यम दीया कब जलेगा?
इस वर्ष धनतेरस 18 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी और इसी दिन शाम के समय यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है, जो पांच दिनों तक यानी भाई दूज तक रोज़ जलाया जाता है।
यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। हर शाम इसे नए सिरे से जलाया जाता है और अगली सुबह विसर्जित कर दिया जाता है। मान्यता है कि यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

Dhanteras 2025 Yam Deepak Jalane Ke Niyam Puja Vidhi and Mantra in Hindi
यह दीपदान धनतेरस या नरक चतुर्दशी की रात को किया जाता है। - फोटो : AdobeStock

धनतेरस पर यम का दीपक क्यों जलाया जाता है?
धनतेरस के दिन यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा बहुत प्राचीन और धार्मिक महत्व रखती है। यह दीपक अकाल मृत्यु के भय को दूर करने और यमराज से दीर्घायु तथा अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद पाने के लिए जलाया जाता है। इसे यम दीप या यम दीपदान कहा जाता है।
इस परंपरा के अनुसार, दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। यह दीपदान धनतेरस या नरक चतुर्दशी की रात को किया जाता है और इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मकता और सुरक्षा बनी रहती है।

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Dhanteras 2025 Yam Deepak Jalane Ke Niyam Puja Vidhi and Mantra in Hindi
यम दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार को लंबी उम्र व अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। - फोटो : freepik

यम दीपक जलाने के लाभ 

  • यमराज के नाम का दीपक जलाने से व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों पर अकाल मृत्यु का संकट नहीं आता। यह दीपक एक प्रकार की रक्षा कवच का काम करता है, जो जीवन में अचानक आने वाली अनहोनी घटनाओं से बचाता है।
  • यम दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार को लंबी उम्र व अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। यह आशीर्वाद जीवन में स्थायित्व और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।\
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, यम का दीपक जलाने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद नरक में जाने की नौबत नहीं आती। यह कर्मों की शुद्धि और आत्मा की शांति का प्रतीक माना जाता है।
  • दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से घर के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ शक्तियां दूर होती हैं। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और मानसिक शांति का अनुभव होता है।\
  •  यम दीपक का प्रकाश परिवार के बीच प्रेम, एकता और सौहार्द्र बनाए रखता है। यह परंपरा न केवल आध्यात्मिक लाभ देती है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी सुरक्षा और संतोष का भाव उत्पन्न करती है।
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Dhanteras 2025 Yam Deepak Jalane Ke Niyam Puja Vidhi and Mantra in Hindi
दीपक को अन्य किसी दिशा में रखने से इसका धार्मिक प्रभाव कम हो जाता है। - फोटो : अमर उजाला

यम दीपक जलाने के नियम 

  • यम दीपक जलाने की परंपरा धनतेरस की रात से शुरू होकर भाई दूज तक चलती है। इस दौरान हर दिन एक नया दीपक जलाना अनिवार्य होता है। दीपक मिट्टी, आटे या गोबर से बना चौमुखा (चार बातियों वाला) होना चाहिए। पुराने या इस्तेमाल किए हुए दीपक को दुबारा जलाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि नया दीपक नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होता है।
  • यमराज की दिशा दक्षिण मानी गई है, इसलिए यम दीपक को हमेशा घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर ही रखना चाहिए। इस दिशा में दीपक जलाने से यमराज की कृपा प्राप्त होती है और घर में नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। दीपक को अन्य किसी दिशा में रखने से इसका धार्मिक प्रभाव कम हो जाता है।
  • दीपक जलाने के बाद व्यक्ति को दीपक की ओर से या पूजा स्थल से वापस लौटते समय पीछे मुड़कर देखने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पीछे मुड़कर देखने से यमराज की कृपा कम हो सकती है और दीपदान का प्रभाव अधूरा रह सकता है। यह नियम श्रद्धा और विश्वास के साथ पालन करना चाहिए।
  • दीपक को हर दिन शाम को जलाने के बाद अगली सुबह सूर्योदय के समय या सूरज निकलने के बाद विसर्जित करना आवश्यक होता है। विसर्जन करने के लिए साफ पानी, नदी, तालाब या पौधों के पास इसे प्रवाहित किया जा सकता है। विसर्जन से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और नई शुरुआत के लिए जगह बनती है।
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