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History Of Dhanteras: क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार? जानिए क्या है इसका महत्व

Tue, 11 Oct 2022 03:40 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Tue, 11 Oct 2022 03:40 PM IST
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dhanteras 2022 story behind celebration of dhanteras and Religious importance
क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार - फोटो : iStock
History Of Dhanteras: प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस दिवाली के दो दिन पूर्व मनाया जाने वाला त्योहार है, लेकिन इस बार तिथियों के संयोग की वजह से धनतेरस के अगले दिन ही दिवाली मनाई जाएगी। इस साल धनतेरस 23 अक्टूबर और दिवाली 24 अक्टूबर को है।शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। इसलिए इसे धनतेरस के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन धन्वंतरि देव के साथ मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन बर्तन के अलावा कोई भी सामान खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि धनतेरस का त्योहार क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई... 


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dhanteras 2022 story behind celebration of dhanteras and Religious importance
क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार - फोटो : iStock

भगवान धन्वंतरि का हुआ था जन्म
मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार के लिए ही भगवान विष्णु ने धन्वंतरि का अवतार में जन्म लिया था। शास्त्रों के अनुसार भगवान धनवंतरी देवताओं के वैद्य हैं। इनकी पूजा से आरोग्य सुख यानी स्वास्थ्य लाभ मिलता है। 

धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। वहीं कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि के उत्पन्न होने के दो दिनों बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, इसलिए धनतेरस के दो दिन बाद दीपावली का पर्व मनाया जाता है। 

 

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क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार - फोटो : iStock

श्री हरि विष्णु के वामन अवतार से भी है संबंध
धनतेरस से जुड़ी एक और मान्यता के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए। शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना। लेकिन बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी। वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि, दान करने के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गए।

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क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार - फोटो : अमर उजाला

इसकी वजह से कमंडल से जल निकलने का मार्ग बंद हो गया। वामन अवतार में भगवान विष्णु शुक्राचार्य की चाल को समझ गए। भगवान वामन ने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमंडल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गयी। शुक्राचार्य छटपटाकर कमण्डल से निकल आये। बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि दान कर दिया।

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क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार - फोटो : iStock

इसके बाद भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पैर से अंतरिक्ष को। तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुणा धन-संपत्ति देवताओं को मिल गई। इस उपलक्ष्य में भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

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