कार्तिक माह की शुक्ल
एकादशी को भगवान चार महीने के निद्रा के बाद आज यानि मंगलवार, 31 अक्टूबर को जागेंगे। भगवान के जागने के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। इसके अलावा माता तुलसी का शालिग्राम के साथ विवाह भी किया जाता है।
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हिन्दू मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु पिछले चार महीने से निद्रावस्था में होते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान के सो जाने के कारण इन चार महीनों में तमाम बुरी ताकते सक्रिय हो जाती है इसलिए शास्त्रों में इन चार माह खुद को पूजा-पाठ में ज्यादा लगाने को कहा गया है।
जैसे ही भगवान निद्रा में चले जाते हैं उसी समय से सभी मंगल कार्य जैसे शादी-विवाह, नया घर खरीदना और नए घर में प्रवेश करना अच्छा नहीं माना जाता है। जैसे ही चातुर्मास के खत्म होता है देवउठनी एकाकशी के दिन से सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
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देव एकादशी के दिन माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से किये जाने की प्रथा निभाई जाती है। इस एकादशी के दिन घर पर तुलसी विवाह की तैयारी की जाती है। घरों में गन्ने से छोटा सा विवाह मंडप तैयार करके भगवान के साथ उनका विवाह किया जाता है।
एकादशी की तिथि सोमवार यानि 30 अक्टूबर शाम 7 बजकर 03 मिनट से लग गई है। एकादशी का खास मुहूर्त 31 अक्टूबर मंगलवार को 6 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगी जोकि 1 नवंबर यानि बुधवार को शाम 5 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी।