Chaturmas 2025: पंचांग के मुताबिक आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार मास की योग निद्रा में जाते हैं, जिसके बाद चातुर्मास लगता है। इन चार महीनों में सृष्टि का संचालन देवों के देव महादेव करते हैं। चूंकि श्रीहरि योग निद्रा में होते हैं, इसलिए शादी-विवाह, तिलक, नए काम की शुरुआत से लेकर मुंडन जैसे शुभ कार्य करने की मनाही होती हैं। इस साल 6 जुलाई 2025 को देवशयनी एकादशी थी और इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में चातुर्मास की अवधि में पूजा-पाठ से लेकर खरीदारी में विशेष सावधानियां बरती जाती हैं। खासतौर पर खानपान का खास ख्याल रखा जाता है। मान्यता है कि चातुर्मास में कुछ चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए अन्यथा सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।
Chaturmas 2025: चातुर्मास में नहीं करना चाहिए इन चीजों का सेवन, जानिए क्या है कारण
Chaturmas 2025: हिंदू धर्म में चातुर्मास की अवधि में पूजा-पाठ से लेकर खरीदारी में विशेष सावधानियां बरती जाती हैं। खासतौर पर खानपान का खास ख्याल रखा जाता है।
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न करें इन चीजों का सेवन
चातुर्मास की शुरुआती अवधि में बरसात होने के कारण अक्सर सेहत से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। यही नहीं इसका प्रभाव सब्जियों पर भी पड़ता है। इसलिए चातुर्मास में साग, पालक, मेथी सहित अन्य हरी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। बारिश और मौसम में बदलाव होने के कारण इनमें कीड़े हो जाते हैं।
आप किसी भी प्रकार की गोभी का सेवन भी न करें। माना जाता है कि बारिश के समय इसके अंदर बहुत छोटे-छोटे कीड़ें हो जाते हैं। यदि भूल से भी इन्हें ग्रहण कर लिया जाए, तो कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा चातुर्मास में बैंगन भी नहीं खाना चाहिए। इसमें कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो पथरी का कारण बन सकती है।
- चातुर्मास में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
- इस अवधि में बिस्तर जमीन पर लगाना चाहिए। इससे सकारात्मकता बनी रहती है।
- विष्णु जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
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- महादेव की विधि-विधान से पूजा करें।
- चातुर्मास में दान जैसे पुण्य कार्य करना कल्याणकारी होता है।
- घर से बहु या बेटी को विदा नहीं करना चाहिए।