शारदीय नवरात्रि 2026 की तारीख को लेकर इस बार लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसकी वजह यह है कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात से शुरू हो रही है, जबकि नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्तूबर को माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कलश स्थापना किस दिन होगी और नवरात्रि का पहला व्रत कब रखा जाएगा?
शारदीय नवरात्रि 2026: 10 या 11 अक्तूबर कब शुरू होगा नवरात्रि? जानें सही तिथि और कलश स्थापना का समय
शारदीय नवरात्रि 2026 की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच भ्रम है। प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात शुरू होगी, लेकिन नवरात्रि का पहला व्रत और घटस्थापना 11 अक्तूबर को होगी। जानें पंचांग के अनुसार सही तारीख, मुहूर्त और वजह।
रात में प्रतिपदा शुरू होने का मतलब क्या है?
हिंदू पंचांग की तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर की तरह आधी रात को नहीं बदलतीं। तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के बीच बनने वाली कोणीय दूरी से होता है। जब यह दूरी 12 अंश बढ़ जाती है, तो एक नई तिथि शुरू होती है। इसलिए तिथि का परिवर्तन सुबह, दिन या रात किसी भी समय हो सकता है।
इसी वजह से एक हिंदू तिथि दो अलग-अलग अंग्रेजी तारीखों के बीच आ सकती है। केवल तिथि शुरू होने का समय देखकर व्रत या त्योहार की तारीख तय करना सही नहीं होता। किस धार्मिक अनुष्ठान के लिए कौन-सी तिथि मान्य होगी, यह भी देखना आवश्यक है।
11 अक्तूबर को ही क्यों होगी घटस्थापना?
11 अक्तूबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी। इसे उदयातिथि कहा जाता है। इसी आधार पर नवरात्रि का पहला व्रत रखा जाएगा और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। हालांकि हर पर्व और धार्मिक अनुष्ठान के लिए उदयातिथि का नियम लागू हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ अवसरों पर विशेष काल की तिथि को प्राथमिकता दी जाती है।
घटस्थापना के लिए प्रतिपदा के साथ उपयुक्त समय भी जरूरी होता है। रात में कलश स्थापना करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए 10 अक्तूबर की रात प्रतिपदा शुरू होते ही घटस्थापना करने के बजाय 11 अक्तूबर को निर्धारित मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाएगा।
घटस्थापना का मुहूर्त
11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय के आधार पर मुहूर्त में अंतर हो सकता है। हालांकि स्थान के अनुसार घटस्थापना का मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है।
इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग भी रहेंगे। इन स्थितियों को घटस्थापना के लिए सामान्यतः अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन पंचांग में इन्हीं परिस्थितियों के बीच निर्धारित घटस्थापना मुहूर्त दिया गया है। इसलिए इनके कारण नवरात्रि की शुरुआत एक दिन आगे नहीं बढ़ेगी।
10 अक्तूबर की रात सामान्य देवी पूजा, आरती या नाम-स्मरण किया जा सकता है। पूजा की तैयारी और आवश्यक सामग्री पहले से व्यवस्थित करना भी संभव है। लेकिन नवरात्रि की औपचारिक शुरुआत के लिए घटस्थापना और पहला व्रत 11 अक्तूबर को ही होगा।
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