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Chaitra Navratri 2022: रामनवमी कब है? जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Thu, 07 Apr 2022 07:25 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 07 Apr 2022 07:25 AM IST
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Chaitra Navratri 2022 Know When is Ram Navami 2022 Pooja Vidhi Shubh Muhurat in Hindi
नवरात्रि के आखिरी दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में ये पर्व मनाया जाता है।  - फोटो : SELF

Chaitra Navratri 2022: सनातन हिंदू धर्म में प्रत्येक त्योहार का एक विशेष महत्व है। नवरात्रि भी उन्हीं में से एक है। वैसे तो पूरे साल में चार बार नवरात्रि आती है लेकिन इनमें से शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है।  चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इन नवरात्रि की शुरुआत होती है।  इन दिनों में मां के 9 स्वरुपों की पूजा की जाती है।  भक्तों में नवरात्रि को लेकर बहुत उत्साह देखने को मिलता है। नवरात्रि के आखिरी दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में ये पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राम जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाता है।  इस दिन विधिविधान के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना की जाती है।  आइए जानते हैं रामनवमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

Chaitra Navratri 2022 Know When is Ram Navami 2022 Pooja Vidhi Shubh Muhurat in Hindi
इस दिन विधिविधान के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना की जाती है।

राम नवमी का शुभ मुहूर्त 2022
राम नवमी तिथि-
10 अप्रैल 2022, रविवार
नवमी तिथि प्रारंभ - 10 अप्रैल को देर रात 1:32 मिनट से शुरू
नवमी तिथि समाप्त- 11 अप्रैल को सुबह 03:15 मिनट पर तक
पूजा का मुहूर्त- 10 अप्रैल को सुबह 11: 10 मिनट से 01: 32 मिनट तक

Chaitra Navratri 2022 Know When is Ram Navami 2022 Pooja Vidhi Shubh Muhurat in Hindi
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है।
रामनवमी का महत्व 
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि त्रेता युग में धरती पर असुरों का उत्पात बढ़ गया था। असुर ऋषियों के यज्ञ को खंडित कर दिया करते थे। धरती पर आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए भगवान विष्णु ने धरती पर श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। भगवान श्रीराम ने धर्म की स्थापना के लिए पूरे जीवन अपार कष्टों को सहा और एक आदर्श नायक के रूप में स्वयं को स्थापित किया। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहा जाता है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में श्रीराम ने धर्म का त्याग नहीं किया और न ही अनीति का वरण किया। इस सब गुणों के चलते उन्हें उत्तम पुरुष की संज्ञा मिली और मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया।
 
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Chaitra Navratri 2022 Know When is Ram Navami 2022 Pooja Vidhi Shubh Muhurat in Hindi
श्री राम, लक्ष्मण जी और मां सीता की आरती करें और लोगों में प्रसाद वितरण करें।   - फोटो : istock

राम नवमी पूजा विधि

  • राम नवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें।  
  • इसके बाद पूजास्थल को स्वच्छ करके भगवान राम की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके बाद उन्हें कुमकुम, सिंदूर, रोली, चंदन, आदि से तिलक लगाएं। 
  • इसके बाद चावल और तुलसी अर्पित करें। राम नवमी के दिन श्री राम को तुलसी अर्पित करने से वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।
  • पूजा में देवी-देवताओं को फूल अर्पित करें और मिठाई का भोग लगाएं।  
  • फिर घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर श्री रामचरित मानस , राम रक्षा स्तोत्र या रामायण का पाठ करें। 
  • श्री राम, लक्ष्मण जी और मां सीता की आरती करें और लोगों में प्रसाद वितरण करें।  
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Chaitra Navratri 2022 Know When is Ram Navami 2022 Pooja Vidhi Shubh Muhurat in Hindi
रामनवमी पर श्री राम के इन मंत्रों का जाप करें। - फोटो : iStock

श्री राम के इन मंत्रों का करें जाप 

'रां रामाय नम:' 

भगवान श्रीराम का यह मंत्र बेहद ही प्रभावशाली होता है। इस मंत्र को श्रीराम पूजा में 108 बार जपें। इस मंत्र को सच्चे मन से जपने से भक्तगणों की सारी विपदाएं नष्ट हो जाती हैं। आरोग्य जीवन के लिए भी यह राम मंत्र कारगर है।

'ॐ नमो भगवते रामचंद्राय' 
भगवान श्रीराम का जीवन संपूर्ण मानव जाति के लिए एक आदर्श है। इसलिए राम नवमी के दिन आप श्रीराम से जुड़ा यह मंत्र 108 बार जपें। इस मंत्र के जाप से आपके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। 

'ॐ दशरथाय विद्महे सीता वल्लभाय धीमहि तन्नो श्रीराम: प्रचोदयात्।
यह श्रीराम गायत्री मंत्र है। शास्त्रों में ऐसा लिखा गया है कि इसके जप से व्यक्ति के सारे संकट दूर हो जाते हैं। उसके जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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