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Chaitra Navratri 2020: चैत्र नवरात्रि आरंभ, जानें नौ दिनों की पूजा से कैसा मिलता फल

Wed, 25 Mar 2020 09:25 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 25 Mar 2020 09:25 AM IST
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chaitra navratri 2020 puja timing muhurat vidhi and facts
navratri 2020

Chaitra Navratri 2020 देवी भागवत के अनुसार देवी ही ब्रह्मा,विष्णु एवं महेश के रूप में सृष्टि का सृजन,पालन और संहार करती हैं।अर्थात यही सृजन,पालन और संहार करने वाली आद्या परमशक्ति हैं। ये ही पराशक्ति नवदुर्गा,दस महाविद्या हैं। ये ही नर और नारी हैं एवं ये ही माता,धाता तथा पितामह हैं। ये ही महाशक्ति परम ब्रह्म परमात्मा है। इनके विविध स्वरुप हैं जो अनेकों रूपों में विभिन्न लीलाएं करती हैं।भगवान महादेव के कहने पर रक्तबीज शुंभ-निशुंभ,मधु-कैटभ आदि दानवों का संहार करने के लिए माँ पार्वती ने असंख्य रूप धारण किए किंतु देवी के प्रमुख नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी माँ के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है और हर स्वरुप की उपासना करने से अलग-अलग प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं।



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शैलपुत्री
प्रथम शैलपुत्री
नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश पूजा के साथ ही माँ दुर्गा के पहले स्वरूप 'शैलपुत्री जी' का पूजन किया जाता है। इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहां से योगसाधना आरम्भ होती है।

- पूजा फल- माँ शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।
- मन विचलित होता हो और आत्मबल में कमी हो तो शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता है।

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द्वितीय ब्रह्मचारिणी 
माँ दुर्गा की नवशक्तियों का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी का है। साधक दुर्गापूजा के दूसरे दिन अपने मन को स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित करते हैं और माँ की कृपा प्राप्त करते हैं।

पूजा फल- 
इनकी पूजा से अनंत फल की प्राप्ति एवं तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है। इनकी उपासना से साधक को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। 
लालसाओं से मुक्ति के लिए माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान लगाना अच्छा होता है। 

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देवी चंद्रघंटा
तृतीय चंद्रघंटा
नवरात्र के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाती है एवं इस दिन साधक का मन 'मणिपुर चक्र' में प्रविष्ट होता है।
पूजा फल- 
- इनकी आराधना से साधकों को चिरायु,आरोग्य,सुखी और संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है तथा स्वर में दिव्य,अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। प्रेत-बाधादि से ये अपने भक्तों की रक्षा करती है।
- क्रोधी,छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाने और तनाव लेने वाले तथा पित्त प्रकृति के लोग मां चंद्रघंटा की भक्ति करें। 

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चतुर्थ कूष्माण्डा 
नवरात्र के चौथे दिन साधक अपने मन को माँ के चरणों में लगाकर अदाहत चक्र में स्थित करते हैं। 
पूजा फल 
- देवी कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग,शोक और विनाश से मुक्त करके आयु,यश,बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।
- यदि प्रयासों के बावजूद भी मनोनुकूल परिणाम न मिलता हो,तो कूष्मांडा स्वरुप की पूजा से मनोवांछित फल प्राप्त होने लगते हैं।

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