Amalaki Ekadashi 2025: भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए एकादशी तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है। इस दिन पूजा पाठ व व्रत रखने से साधक को धन, धान्य, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति होती हैं, इतना ही नहीं यह तिथि पितरों आशीर्वाद पाने के लिए भी शुभ है। इस दौरान फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को सभी में खास माना गया है। इसे आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु वास करते हैं, इसलिए इस दिन आंवले के पवित्र वृक्ष की पूजा का विधान है।
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Amalaki Ekadashi 2025: आखिर क्यों खास है आमलकी एकादशी, जानें कैसे करें इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न
Thu, 06 Mar 2025 07:12 AM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Thu, 06 Mar 2025 07:12 AM IST
सार
Amalaki Ekadashi 2025: भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए एकादशी तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है। इस दिन पूजा पाठ व व्रत रखने से साधक को धन, धान्य, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति होती हैं
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आमलकी एकादशी 2025
- फोटो : amar ujala
ऐसा कहा जाता है कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर विष्णु जी के मुख से चंद्रमा के समान एक छोटा-सा बिंदु पृथ्वी पर गिर गया था।
- फोटो : freepik
क्यों खास है आमलकी एकादशी ?
ऐसा कहा जाता है कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर विष्णु जी के मुख से चंद्रमा के समान एक छोटा-सा बिंदु पृथ्वी पर गिर गया था। इसके बाद इस बिंदु से आंवले का पेड़ उत्पन्न हुआ था। तभी से इस तिथि को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर साधक पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
आमलकी एकादशी की पूजा विधि
- फोटो : freepik
आमलकी एकादशी की पूजा विधि
- आमलकी एकादशी के दिन सुबह ही स्नान करें और व्रत का संकल्प ले।
- इसके बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- अब पूजा के लिए सभी सामग्रियों को एकत्रित करें।
- सबसे पहले एक साफ चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- अब प्रभु को वस्त्र अर्पित करें।
- भगवान को पीले रंग के फूलों की माला और चंदन लगाएं।
- पूजा में तुलसी के पत्ते भी श्रीहरि को अर्पित करें।
- दीपक जला लें।
- आमलकी एकादशी की कथा पढे़ं।
- भगवान विष्णु की आरती करें।
- इस दिन आंवले के पेड़ की भी पूजा करें।
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भगवान विष्णु का बीज मंत्र
- फोटो : adobe stock
भगवान विष्णु का बीज मंत्र
ॐ बृं
भगवान विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:
भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र
शांताकारं भुजगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
भगवान विष्णु का शक्तिशाली मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ बृं
भगवान विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:
भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र
शांताकारं भुजगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
भगवान विष्णु का शक्तिशाली मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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भगवान विष्णु की आरती
- फोटो : Amar Ujala
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
Amalaki Ekadashi 2025: आमलकी एकादशी के दिन इस उपाय से पाएं श्री हरि का आशीर्वाद, दूर होंगे सभी संकट
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।