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Akshaya Tritiya 2022 : 03 मई को अक्षय तृतीया, जानिए इस तिथि का महत्व और क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

Manoj Kumar Dwivedi मनोज कुमार द्विवेदी
Updated Tue, 26 Apr 2022 08:10 AM IST
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Akshaya Tritiya 2022 Date Know About Akshaya Tritiya Festivals Significance And Importance In Hindi
akshaya tritiya 2022: शास्त्रों में अक्षय तृतीया को विशेष अबूझ मुहूर्त कहा गया है। इस विशेष दिन पर शुभ कार्य करने, शुभ खरीदारी करने और दान करने की विशेष महत्व होता है। - फोटो : iStock
अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह पर्व इस बार 03 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि त्रेता और सतयुग का आरंभ भी इसी तिथि को हुआ था,इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहते हैं। अनेकों शास्त्रों के अनुसार इस दिन स्नान,दान,जप,होम,स्वाध्याय,तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं वे सब अक्षय हो जाते हैं। यह तिथि सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली मानी गई है। इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी पार्वती हैं।
Akshaya Tritiya 2022 Date Know About Akshaya Tritiya Festivals Significance And Importance In Hindi
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स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त है यह तिथि
बिना पंचांग देखे भी इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। तृतीया तिथि को पार्वती जी ने अमोघ फल देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद दिया था। उस आशीर्वाद के प्रभाव से इस तिथि को किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता। व्यापार आरम्भ, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ अक्षय रहता है अर्थात वह कभी नष्ट नहीं होता। धर्मराज को इस तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती कहती हैं कि कोई भी स्त्री,जो किसी भी तरह का सुख चाहती है उसे यह व्रत करते हुए नमक का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए। स्वयं में भी यही व्रत करके मैं भगवान शिव के साथ आनंदित रहती हूं। 

विवाह योग्य कन्याओं को भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करना चाहिए। जिनको संतान नहीं हो रही हो वे स्त्रियां भी इस व्रत करके संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं। प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी इसी व्रत के कारण अपने पति चंद्र की सबसे प्रिय रानी रहीं। स्वर्ग के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणी इसी व्रत के पुण्य प्रताप से जयंत नामक पुत्र की मां बनी। देवी अरुंधति ने यही व्रत करके अपने पति महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त किया।

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अक्षय तृतीया 2022 - फोटो : अमर उजाला

दान करने से मिलता है पुण्य
शास्त्रों के अनुसार इस माह में प्याऊ लगाना,छायादार वृक्ष की रक्षा करना,पशु-पक्षियों के खान-पान की व्यवस्था करना,राहगीरों को जल पिलाना जैसे सत्कर्म मनुष्य के जीवन को समृद्धि के पथ पर ले जाते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व है अर्थात अनेकों तीर्थ करने से जो फल प्राप्त होता है वह केवल वैशाख मास में जलदान करने से प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा छाया चाहने वालों को छाता दान करना और पंखे की इच्छा रखने वालों को पंखा दान करने से ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो विष्णुप्रिय वैशाख में पादुका दान करता है,वह यमदूतों का तिरस्कार करके विष्णुलोक को जाता है। इस माह में शिवलिंग पर जल चढाने या गलंतिका बंधन करने का(मटकी लटकाना) विशेष पुण्य बताया गया है।  

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नीम की कोपल और सत्तू का लगाएं भोग
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर गंगा या किसी भी पवित्र नदी अथवा घर में ही स्नान करने के बाद भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की शांत चित्त होकर पूजा करने का विधान है। इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा सफेद,पीले रंग के कमल या गुलाब के पुष्प से करनी चाहिए। नैवेद्ध में गेहूं,जौ,चने का सत्तू,मिश्री,नीम की  कोपल,ककड़ी और चने की भीगी दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।
 
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यह तिथि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के प्रारम्भ का दिन भी है इसलिए अक्षय तृतीया के दिन जलभरे से घड़े,कुल्हड़,सकोरे,पंखे,पादुका,चटाई,छाता, चावल,नमक,घी,ख़रबूज़ा,ककड़ी,मिश्री,सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान महा पुण्यकारी माना गया है। लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ ही सुख-सौभाग्य-समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन भी किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन दान देने वाला प्राणी सूर्य लोक को जाता है। जो इस तिथि को उपवास करता है वह रिद्धि-वृद्धि और श्री से संपन्न हो जाता है।
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