Aja Ekadashi 2025 Date: एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जिसे हर माह के शुक्ल-कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है। इस दिन पीली चीजों का दान और श्रीहरि की उपासना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही उसका भाग्योदय भी होता है। इस दौरान माह के अनुसार एकादशी तिथि का नाम होता है, जिसकी अपनी पहचान और महत्व है। वर्तमान में भाद्रपद मास जारी है और इसके कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति को एक हजार गौ दान के समान फल मिलता है। यही नहीं व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं अगस्त में यह व्रत कब रखा जाएगा।
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Aja Ekadashi 2025: अगस्त में कब रखा जाएगा अजा एकादशी का व्रत, जानें तिथि, योग और पूजा विधि
Wed, 13 Aug 2025 03:24 PM IST
मेघा कुमारी
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 13 Aug 2025 03:24 PM IST
सार
Aja Ekadashi 2025: पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 18 अगस्त को शाम 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 19 अगस्त को दोपहर 3.33 बजे होगा।
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Aja Ekadashi 2025
- फोटो : Adobe Stock
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अजा एकादशी 2025 तिथि
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 18 अगस्त को शाम 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 19 अगस्त को दोपहर 3.33 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार अजा एकादशी 19 अगस्त को मनाई जाएगी। वहीं व्रत का पारण 20 अगस्त को सुबह 5:53 बजे से 8:29 बजे तक कर सकते हैं।
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पूजा विधि
- एकादशी पर पूजा के लिए आप एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रख लें।
- अब प्रभु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। फिर उन्हें पीली मिठाई, फूल, फल और मखाने की खीर का भोग लगाएं।
- देसी घी से दीप जलाएं और धूप भी उठा लें।
- एकादशी व्रत की कथा पढ़ें। विष्णु जी की आरती करें।
- लक्ष्मी माता को फूल चढ़ाएं।अब विष्णु जी और लक्ष्मी माता की आरती करें।
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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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सुख-समृद्धि के लिए मंत्र
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी ॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र
ऊँ महालक्ष्म्यै नमो नमः । ऊँ विष्णुप्रियायै नमो नमः ।।
ऊँ धनप्रदायै नमो नमः । ऊँ विश्वजन्नयै नमो नमः ।।
लक्ष्मी जी का बीज मंत्र
ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:।।
श्री लक्ष्मी महामंत्र
ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी ॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र
ऊँ महालक्ष्म्यै नमो नमः । ऊँ विष्णुप्रियायै नमो नमः ।।
ऊँ धनप्रदायै नमो नमः । ऊँ विश्वजन्नयै नमो नमः ।।
लक्ष्मी जी का बीज मंत्र
ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:।।
श्री लक्ष्मी महामंत्र
ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।