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इसी मूर्ति ने मिटाया था राजा का खौफनाक श्राप

Sat, 21 Feb 2015 09:04 AM IST
Updated Sat, 21 Feb 2015 09:04 AM IST
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इसी मूर्ति ने मिटाया था राजा का खौफनाक श्राप

raghunath temple history of kullu.

त्रेता युग के दौरान भगवान श्रीराम ने अश्वमेघ यज्ञ के लिए भगवान रघुनाथ की इस मूर्ति को अपने हाथों से बनाया था। यज्ञ पूरा होने पर इसे श्रीराम ने अपने राज्य में ही स्‍थापित किया था। मगर कुल्‍लवी राजा अपने पाप धोने के लिए इसे हिमाचल ले आया था।

इसी मूर्ति ने मिटाया था राजा का खौफनाक श्राप

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ये कहानी राजा जगत सिंह से जुड़ी है जिसने अपने अहंकार में एक बड़ा पाप कर दिया था। इसके बदले उसे ऐसा खौफनाक शाप मिला था कि उसका जीना मुश्किल हो गया था।

इसी मूर्ति ने मिटाया था राजा का खौफनाक श्राप

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कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में कुल्‍लू में राजा जगत सिंह का राज था। एक दिन उसे सूचना मिली कि गांव के एक पंडित दुर्गादत्त को घाटी में काम करते वक्त कुछ हीरे मोती मिले हैं। राजा उसे पाना चाहता था। अहंकार में आकर उसने इन्हें पाने की ठान ली।

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इसी मूर्ति ने मिटाया था राजा का खौफनाक श्राप

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राजा ने सैनिकों को आदेश दिए कि दुर्गादत्त से सारे मोती छीनकर खजाने में जमा किए जाएं। सैनिक भी चले गए और दुर्गादत्त को खूब मारा पीटा लेकिन हीरे मोती नहीं मिले। उसे आए दिन सबके सामने सजा दी जाने लगी।

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ऐसा माना जाता है कि शायद दुर्गादत्त के पास ज्ञान के अलावा और कुछ नहीं था। जब राजा का जुल्म हद से बढ़ गया तो दुर्गादत्त ने खुद को परिवार सहित अपने घर में बंद कर लिया। इसके बाद उसने घर को आग लगा दी और खुद भी परिवार सहित जल गया।

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