भाखड़ा बांध निर्माण में अपना सब कुछ गवाने के बाद हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर के तंगलोह गांव में बसे लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। हालत है कि 70 साल से गांव के लिए सड़क तक नहीं है। गांव के लड़कों-लड़कियों से इसी कारण लोग शादी करवाने से कतराते हैं।
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तंगलोह गांव की ओर जाने वाला रास्ता।
- फोटो : अमर उजाला
दूसरों का घर रोशन करने वाले तंगलोह गांव के लोगों का अपना जीवन अंधकार में है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे पीठ पर उठाकर सड़क तक लाना पड़ता है। कोई रात को बीमार होता है तो उसे अस्पताल भी नहीं पहुंचाया जा सकता है। रास्ता संकरा है और क्षेत्र में तेंदुओं का खतरा है।
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गांव के लोग रास्ते की तरफ इशारा करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय लोगों कर्म सिंह, जगदीश सिंह, बलवंत सिंह, तरसेम सिंह, धर्म सिंह, इंद्रपाल, विक्रम सिंह, रोहित कुमार, प्रकाश चंद, सुभाष, रविंद्र सिंह, चौधरी राम, राकेश कुमार, विजय सिंह, अभिलाषा सिंह, संदीप सिंह, मलकियत सिंह, रत्न सिंह, मेहर सिंह, ऋषि राम, करतार सिंह, महेंद्र सिंह, जगत राम, कृष्णी देवी, अहिल्या देवी, शकुंतला देवी, निशा, ज्योति, कांता देवी, उमा देवी, पूजा, सीमा देवी, सुमन कुमारी, प्रवीण कुमारी, गीता देवी आदि ने कहा कि गांव तीनों ओर से गोबिंद सागर झील से घिरा हुआ है।
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गांव की ओर जाने वाला रास्ता।
- फोटो : अमर उजाला
भाखड़ा बांध बनने से बेघर हुए लोगों को आज दिन तक सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। बरठीं के सहायक अभियंता प्रवीण कुमार वर्मा के अनुसार स्थानीय लोग जमीन देने के लिए सहमत हों तो विभाग गांव के लिए सड़क निर्माण का प्रयास करेगा।
डाहाड़ पंचायत की प्रधान इंद्रा देवी का कहना है कि गांव में मूलभूत सुविधाएं न होने से क्षेत्र में कई युवाओं की शादी टूट चुकी है। गांव में कई लड़के-लड़कियां हैं जिनकी शादी सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाएं न होने से नहीं हो पा रही है। अभी भी पंचायत में 10-15 लड़के और लड़कियां ऐसे हैं जिनकी उम्र 30 साल से ऊपर हो गई है। इनकी शादी नहीं हो पा रही है। पंचायत रास्ता बनाने का प्रयास कर रही है।