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यूपी-बिहार को हटा दें तो प्रजनन दर अमेरिका जैसी: जनसंख्या का ऐसा नियंत्रण, रह जाएंगे सिर्फ बुजुर्ग

Sat, 19 Sep 2026 06:29 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 19 Sep 2026 06:29 AM IST
सार

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट में भारत की घटती प्रजनन दर को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी और बिहार को छोड़ने पर राष्ट्रीय प्रजनन दर 1.6 रह जाती है, जो अमेरिका के बराबर बताई गई है। 2001 में 2.93 करोड़ से 2023 में वार्षिक जन्म घटकर 2.32 करोड़ रह गए। रिपोर्ट ने कहा कि कम प्रजनन दर वाले राज्यों में भविष्य में बुजुर्ग आबादी बढ़ने की चुनौती सामने आ सकती है।
 

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India Fertility Rate Falls As Population Control Policies Face New Demographic Challenge
प्रजनन दर (प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी आधिकारिक वेबसाइट

विस्तार

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने देश में घटती प्रजनन दर पर गंभीर चिंता जताई है। परिषद ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत अगर जनसंख्या नियंत्रण की पुरानी मानसिकता से बाहर नहीं निकला तो कई राज्य उम्रदराज समाजों में बदल जाएंगे। देश की बदलती जनसांख्यिकी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में जनसंख्या नियंत्रण के पुराने तौर-तरीकों को बदलने की सलाह दी गई है। इस महीने द घोस्ट ऑफ पॉप्युलेशन पास्ट: हाउ पॉप्युलेशन कंट्रोल परसिस्ट्स इन इंडिया शीर्षक से जारी एक कार्य पत्र (वर्किंग पेपर) में ईएसी ने कहा है कि जनसंख्या विस्फोट का डर अब बेबुनियाद है। सरकार की नीति के लक्ष्य के तौर पर जनसंख्या नियंत्रण अब प्रासंगिक नहीं रहा। अन्य देशों का इतिहास बताता है कि एक बार जब प्रजनन दर सामाजिक और मानसिक स्तर पर तय सीमा से नीचे गिर जाती है, तो उसे दोबारा बढ़ाना लगभग नामुमकिन होता है। राष्ट्रीय प्रजनन दर वैसे भी स्वाभाविक रूप से घट रही है। इसलिए हमें इसे और दबाने की जरूरत नहीं है।
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बच्चों की वार्षिक संख्या 25 साल में 20% नीचे
रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारी परिवार नियोजन नीतियों में नई जनसांख्यिकीय वास्तविकता झलकनी चाहिए। भारत में जन्म लेने वाले बच्चों की वार्षिक संख्या 2001 में लगभग 2.93 करोड़ के साथ शीर्ष पर थी। तब से इसमें 20 प्रतिशत की कमी आई है और 2023 में यह संख्या घटकर लगभग 2.32 करोड़ रह गई। वर्तमान में, भारत में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या उसी स्तर पर है, जिस पर यह लगभग 50 साल पहले 1974 में थी। इसके बावजूद हमारा सिस्टम नसबंदी और जनसंख्या नियंत्रण को वित्तीय इनाम देकर बढ़ावा देने में जुटा है।
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1.6राष्ट्रीय प्रजनन
दर...यूपी-बिहार को छोड़कर


आंकड़ों के अनुसार, अगर यूपी और बिहार को हटा दिया जाए जा कुल राष्ट्रीय प्रजनन दर 1.6 रह जाती है, अमेरिका (1.6) और उत्तरी यूरोप (1.5) के बराबर है।
राज्य प्रजनन दर
दिल्ली 1.2%
पंजाब 1.4%
पश्चिम बंगाल 1.3%
सिक्किम 1.0%
महाराष्ट्र 1.4%
आंध्र प्रदेश 1.4%
तेलंगाना 1.5%
कर्नाटक 1.5%
केरल 1.3%
तमिलनाडु 1.3%

दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्य उम्रदराज
आंध्र प्रदेश की प्रजनन दर (1.4), तेलंगाना (1.5), कर्नाटक (1.5), केरल (1.3), तमिलनाडु (1.3), पश्चिम बंगाल (1.3), पंजाब (1.4), दिल्ली (1.2) और सिक्किम (1.0) जैसे राज्यों में टीएफआर काफी नीचे है।
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इन राज्यों की औसत आयु 35 वर्ष के करीब पहुंच रही है, जो भारत की राष्ट्रीय औसत आयु (30 वर्ष) के बजाय अमेरिका (39 वर्ष) जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के करीब है।

आंध्र प्रदेश में 70% महिलाओं की नसबंदी
आंध्र प्रदेश ने दो दशक पहले ही प्रतिस्थापन स्तर हासिल कर लिया था। आज राज्य की 70 फीसदी विवाहित महिलाएं नसबंदी करा चुकी हैं, जो देश में सबसे अधिक है। अब बजट में नसबंदी के लिए कोई इंसेंटिव नहीं रखा गया है।


प्रति वर्ष पैदा होने वाले बच्चे
2001- 2.93 करोड़
2023-2.32 करोड़

तमिलनाडु में विरोधाभासी नियम
अगस्त 2026 में तमिलनाडु ने तीसरे बच्चे के जन्म पर महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया। लेकिन साथ ही, वर्ष 2026-27 में 1.6 लाख महिलाओं की नसबंदी के लिए वित्तीय बजट भी तय किया। यह नीति पूरी तरह विरोधाभासी है।
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