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Rajasthan: रणथंभौर में जवान हो रहे शावकों ने उड़ाई वन विभाग की नींद, टेरेटरी की तलाश में निकल रहे बाहर; जानें

Wed, 04 Jun 2025 05:05 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 04 Jun 2025 05:05 PM IST
सार

Rajasthan: रणथंभौर टाइगर रिजर्व में शावक अब जवान हो रहे हैं। बढ़ती उम्र और स्वभाविक प्रवृत्ति के कारण ये युवा बाघ शावक अब रिजर्व के बाहर निकल रहे हैं। इन्हें बार-बार पकड़कर वापस जंगल में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अगली ही बार कोई और शावक बाहर निकल जाता है। ऐसे में वन विभाग वालों को पकड़ना उनके लिए चुनौती बनी हुई है। पढ़े पूरी खबर।  
 

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Rajasthan News Ranthambore Tiger Cubs Growing Up: Rising Threat for Villagers Details in Hindi
सांकेतिक - फोटो : Meta AI

सवाई माधोपुर स्थित राजस्थान के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। यह वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, लेकिन अब यही सफलता वन विभाग के लिए चुनौती बनती जा रही है। वजह है रणथंभौर में युवा हो रहे बाघ शावक जो टेरेटरी की तलाश में लगातार जंगल की परिधि से बाहर निकल रहे हैं।

वन विभाग की टीमें इन शावकों को बार-बार ट्रैंकुलाइज कर वापस जंगल में छोड़ रही हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। इस स्थिति ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। रणथंभौर में बाघ-मानव संघर्ष की आशंका भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे आसपास के गांवों में भय का माहौल है। 

Rajasthan News Ranthambore Tiger Cubs Growing Up: Rising Threat for Villagers Details in Hindi
सांकेतिक - फोटो : Meta AI

रणथंभौर में कितने बाघ?
939.14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले रणथंभौर टाइगर रिजर्व में लगभग 600 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया है। शेष क्षेत्र को बफर जोन कहा जाता है। हालांकि रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 1068 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 128 वर्ग किलोमीटर पालीघाट-चंबल क्षेत्र भी शामिल है। वर्तमान में रणथंभौर में कुल 80 बाघ 24 नर, 25 मादा और 31 शावक विचरण कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश शावक अब किशोरावस्था में प्रवेश कर चुके हैं और अपनी स्वतंत्र टेरेटरी की खोज में हैं।

Rajasthan News Ranthambore Tiger Cubs Growing Up: Rising Threat for Villagers Details in Hindi
सांकेतिक - फोटो : META AI

टेरेटरी की तलाश में बाहर निकल रहे शावक
बढ़ती उम्र और स्वभाविक प्रवृत्ति के कारण ये युवा बाघ शावक अब रिजर्व के बाहर निकल रहे हैं। इन्हें बार-बार पकड़कर वापस जंगल में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अगली ही बार कोई और शावक बाहर निकल जाता है। इस सिलसिले ने वन विभाग की नींद उड़ा रखी है। साथ ही, इंसानी बस्तियों के पास बाघों के पहुंचने से स्थानीय ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है।

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सांकेतिक - फोटो : Meta AI

क्या बोले विशेषज्ञ
डॉ. खांडल का मानना है कि अगर सरकार और वन विभाग समय रहते ठोस योजना बनाएं, तो इन शावकों के लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध कराया जा सकता है। उनका सुझाव है कि रणथंभौर में अभी भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां बाघों की संख्या कम है। इन क्षेत्रों में शावकों को स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके अलावा रणथंभौर का दूसरा डिवीजन कैलादेवी अभयारण्य, जहां बाघों की संख्या बहुत कम है, वहां भी इन शावकों को बसाया जा सकता है।

इसके साथ ही, राज्य के अन्य टाइगर रिजर्व में नर-मादा के अनुपात को ध्यान में रखते हुए इन शावकों को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा सकती है। इससे न केवल रणथंभौर पर दबाव कम होगा बल्कि अन्य अभयारण्यों में भी बाघों की संख्या बढ़ेगी। डॉ. खांडल यह भी सलाह देते हैं कि इन शावकों को रेडियो कॉलर लगाकर मॉनिटर किया जाए, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और संभावित बाघ-मानव संघर्ष को रोका जा सके।

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सांकेतिक - फोटो : META AI

मंदिर मार्ग पर भी टाइगर मूवमेंट
रणथंभौर के प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग और रणथंभौर दुर्ग के आसपास भी बाघ-बाघिन और शावकों की गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग को इस मार्ग को बार-बार बंद करना पड़ रहा है। इस इलाके में बाघिन एरिहेड व उसके दो शावक, बाघिन रिद्धि व उसके तीन शावक, बाघिन सुल्ताना और उसके तीन शावकों सहित कई अन्य बाघ सक्रिय हैं। डॉ. खांडल के अनुसार, अगले दो से तीन महीनों तक यह खतरा बना रहेगा, क्योंकि शावक अभी अपनी मां से पूरी तरह अलग नहीं हुए हैं। गर्मी के चलते इन्हें तत्काल अन्यत्र शिफ्ट करना भी संभव नहीं है। मौसम अनुकूल होते ही इन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है।

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