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Kekri: श्रद्धा से मनाया आचार्य विद्यासागरजी का प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव, बच्चों ने नृत्य से किया मंत्रमुग्ध

Thu, 06 Feb 2025 08:04 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 06 Feb 2025 08:04 PM IST
सार

Kekri: बच्चों ने आचार्यश्री के सम्पूर्ण जीवन चरित पर एक नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देकर दर्शकों को अभिभूत कर दिया। बालक बालिकाओं ने संगीतमय पूजन करते हुए भक्ति नृत्य के साथ आचार्यश्री के मनोहारी चित्र के सम्मुख अष्टद्रव्यों के अर्घ्य अर्पित कर महोत्सव का उपसंहार किया।

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Kekri Acharya Vidyasagarji first Samadhi Smriti Mahotsav celebrated with reverence children mesmerized dance
नृत्य करते हुए - फोटो : अमर उजाला

केकड़ी में सापंदा रोड स्थित श्री सुधासागर दिगंबर जैन विद्या विहार सीनियर सैकण्डरी स्कूल में प्रख्यात संत दिवंगत दिगम्बर जैन आचार्य महाश्रमण विद्यासागरजी महाराज का प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव गुरुवार को श्रद्धा व भक्ति से ओतप्रोत विभिन्न धार्मिक प्रस्तुतियों के साथ समारोहपूर्वक मनाया गया।

Kekri Acharya Vidyasagarji first Samadhi Smriti Mahotsav celebrated with reverence children mesmerized dance
बच्चे - फोटो : अमर उजाला

कार्यक्रम का शुभारंभ दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक कैलाशचंद सोनी, अध्यक्ष भंवरलाल बज, संस्था अध्यक्ष संजय कटारिया, सचिव आनंद सोनी, कोषाध्यक्ष प्रमोद बाकलीवाल, समाज श्रेष्ठी सचिन गदिया, अरिहंत बज, समिति सदस्य विनोद पाटनी व सुकेश गंगवाल आदि अतिथियों ने आचार्य विद्यासागरजी महाराज के मनोहारी चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से किया।

Kekri Acharya Vidyasagarji first Samadhi Smriti Mahotsav celebrated with reverence children mesmerized dance
नृत्य करते हुए - फोटो : अमर उजाला

तत्पश्चात कक्षा आठ की छात्राओं ने भक्ति नृत्य व मंगलाचरण से महोत्सव की शुरुआत की। केजी सेक्शन के नन्हें मुन्हें बच्चों ने कर्णप्रिय भजन "हीरे को परख लिया आचार्य ज्ञानसागर ने" प्रस्तुत किया। कक्षा पांच के विद्यार्थियो ने "विद्यासागर की जय हो" गीत पर भक्तिमय प्रस्तुति दी। कक्षा तीन की छात्रा आरवी जैन ने गुरु वंदना की। बाद में नन्हें छात्र-छात्राओं द्वारा आचार्यश्री के जन्म, शिक्षा, दीक्षा, आचार्य पद ग्रहण करने से लेकर लोक कल्याण की साधना व समाधि महाप्रयाण तक की उनकी संपूर्ण जीवन गाथा को बिना रुके, अनवरत क्रम से नृत्य नाटिका के रूप में भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसे देखकर उपस्थित सभी दर्शक अभिभूत व भाव विभोर हो गए। भव्य मंच, मधुर संगीत, प्रभावशाली शब्द संरचना व कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति ने दर्शकों को एकटक कार्यक्रम देखने को मजबूर कर दिया।

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Kekri Acharya Vidyasagarji first Samadhi Smriti Mahotsav celebrated with reverence children mesmerized dance
अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला

इसके बाद सभी अतिथियों ने कक्षा छह व सात के विद्यार्थियो के साथ आचार्य गुरु की विधि विधान पूर्वक पूजन की। पूजन में आचार्यश्री के चित्र के सम्मुख अष्टद्रव्य जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल के अर्घ्य चढ़ाए गए। अर्घ्य समर्पण करने की यह प्रस्तुति बच्चों द्वारा भक्ति नृत्य करते हुए दी गई, जिसने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगणों ने भी सामूहिक भजन प्रस्तुत किये।

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Kekri Acharya Vidyasagarji first Samadhi Smriti Mahotsav celebrated with reverence children mesmerized dance
नृत्य करते हुए - फोटो : अमर उजाला

इस अवसर पर कैलाशचंद सोनी, भंवरलाल बज, संजय कटारिया, आनंद सोनी व अजय जैन ने अपने संबोधन में आचार्य विद्यासागर जी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर जी एक दिव्य पुरुष थे, जिनके जीवन का हर हिस्सा समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उनकी तप साधना एक मिसाल है, जो प्रकृति में सुगंध की तरह महक रही है। उन्होनें कहा कि मूकमाटी महाकाव्य जैसे 100 से अधिक अद्भुत ग्रंथों के रचयिता, 75 गौशालाओं, अनेक अस्पतालों व गुरुकुल विद्यालयों के प्रेरक आचार्यश्री एक वर्ग विशेष के ही नहीं, अपितु समूचे राष्ट्र के ऐसे पूजनीय संत थे, जिन्होंने अपने ज्ञान, संयम, तप, त्याग, आचरण व परोपकार से जन जन को प्रभावित व लाभान्वित किया। उन्होनें वैराग्य धारण करने के उपरांत पचास साल से अधिक की अपनी अनवरत साधना के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 55 हजार किलोमीटर की पदयात्राएं कर श्रमण संस्कृति की धर्म पताका फहराई तथा देशभर में अहिंसा एवं सद्भावना का संदेश फैलाकर समाज व राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की।

वक्ताओं ने अपराजेय साधना से देदीप्यमान आचार्य विद्यासागरजी के जीवन चरित का गुणगान करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया। प्रारम्भ में निदेशक अजय जैन, प्रधानाचार्य एस एन खंडेलवाल, उपप्रधानाचार्य कैलाशचंद शर्मा व विद्यालय के शिक्षकगणों ने अतिथियों का माल्यार्पण एवं साफा बांधकर स्वागत किया। कार्यक्रम का समापन आचार्य विद्यासागरजी महाराज की मंगल आरती से किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक आजाद शर्मा ने किया।

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