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Dussehra 2022: राजस्थान के इस मंदिर में होती है दशानन की पूजा, रावण दहन पर शोक मनाते हैं यहां के लोग

Wed, 05 Oct 2022 08:17 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Wed, 05 Oct 2022 08:17 AM IST
सार

Dussehra 2022: राजस्थान के इस मंदिर में होती है दशानन की पूजा, रावण दहन पर शोक मनाते हैं यहां के लोग

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Shrimali Brahmins worship Ravana in Jodhpur mourns on Dussehra
श्रीमाली ब्रह्माण करते हैं रावण की पूजा - फोटो : Social Media

दशहरे पर देशभर में रावण दहन की परंपरा है। बुराई पर अच्छाई के जीत के इस पर्व को लोग धूमधाम से मनाते हैं लेकिन राजस्थान में एक जगह ऐसी है, जहां लोग रावण दहन के दिन शोक मनाते हैं। इतना ही नहीं यहां रावण का मंदिर है, जहां उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। 

Shrimali Brahmins worship Ravana in Jodhpur mourns on Dussehra
रावण का मंदिर - फोटो : Social Media

खुद को रावण का वंशज मानता है श्रीमाली ब्राह्मण
जोधपुर का श्रीमाली ब्राह्मण समाज खुद को रावण का वंशज और मंडोर को रावण का ससुराल मानता है। जोधपुर में इस गौत्र के करीब 100 से ज्यादा और फलोदी में 60 से अधिक परिवार रहते हैं। 2008 में श्रीमाली ब्राह्मणों ने जोधपुर के मेहरानगढ़ की तलहटी में रावण के मंदिर का निर्माण करवाया था। यहां रावण और मंदोदरी  की शिव की पूजा करते हुए विशाल प्रतिमा स्थापित की गई।

Shrimali Brahmins worship Ravana in Jodhpur mourns on Dussehra
मंदिर में मंदोदरी की मूर्ति - फोटो : Social Media

श्राद्ध पक्ष में रावण का करते हैं तर्पण
मान्यता है कि जब रावण विवाह करने जोधपुर के मंडोर आए, तब श्रीमाली ब्राह्मण उनके साथ बारात में आए थे। विवाह के बाद मंदोदरी के साथ रावण लंका चले गए लेकिन श्रीमाली ब्राह्माण यहीं रह गए। तभी से गोधा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण रावण की विशेष पूजा करते आ रहे हैं। ये रावण दहन के दिन शोक मनाते हैं। यहां तक कि गोधा गोत्र के ब्रह्माण श्राद्ध पक्ष में दशमी पर रावण का श्राद्ध, तर्पण आदि भी करते हैं। अपनों के निधन के बाद जिस तरह स्नान कर यज्ञोपवीत बदला जाता है, दशहरे पर रावण दहन के बाद इस समाज के लोग स्नान कर यज्ञोपवीत बदलते हैं।  

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Shrimali Brahmins worship Ravana in Jodhpur mourns on Dussehra
रावण दहन पर शोक मनाते हैं श्रीमाली ब्राह्मण - फोटो : Social Media

 मंदिर के 200 मीटर तक नहीं किया जाता रावण दहन
लंकापति रावण भी शिव भक्त था। इसलिए यहां शिव की विशेष पूजा की जाती है। रावण के मंदिर के सामने ही मंदोदरी का मंदिर भी बनवाया गया है। जोधपुर के रावण मंदिर के करीब 200 मीटर के दायरे में रावण दहन नहीं किया जाता है। ना ही यहां के कोई लोग रावण दहन देखने के लिए जाते हैं। यहां के लोगों का कहना है कि भले ही रावण को बुराई का प्रतीक माना जाए लेकिन उनके पूर्वजों ने रावण की पूजा की है। रावण बहुत बड़ा विद्वान और संगीतज्ञ था। ऐसे में वह भी रावण की पूजा करते चले आएंगे।

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Dussehra 2022: राजस्थान के इस मंदिर में होती है दशानन की पूजा, रावण दहन पर शोक मनाते हैं यहां के लोग-Shrimali Brahmins worship Ravana in Jodhpur mourns on Dussehra

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