राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जोधपुर प्रवास के दौरान एक स्कूल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने बच्चों से मिड डे मील की गुणवत्ता को लेकर सीधे सवाल किए। मंत्री के पूछने पर बच्चों ने साफ कहा कि उन्हें केवल दाल मिलती है, सब्जी नहीं। इस दौरान शिक्षक और कार्यक्रम संचालक बच्चों को सही उत्तर देने और चुप रहने का इशारा करते देखे गए, लेकिन मंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों को पूरा मिड डे मील उपलब्ध कराया जाए।
बच्चे मन के सच्चे: शिक्षा मंत्री के सामने विद्यार्थियों ने खोली MDM की पोल, अध्यापक करते रहे चुप रहने के इशारे
Rajasthan News: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जब बच्चों से पूछा कि क्या उन्हें मिड डे मील में सब्जी मिलती है, तो पहले मिश्रित जवाब मिला। लेकिन दोबारा पूछने पर बच्चों ने एक स्वर में कहा कि सिर्फ दाल दी जाती है। इस बीच शिक्षक बच्चों को चुप रहने का संकेत करते दिखे। जानें मामला...।
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बच्चों ने बताई सच्चाई, अध्यापक करते रहे इशारे
कार्यक्रम में मंत्री ने जब बच्चों से पूछा कि क्या उन्हें मिड डे मील में सब्जी मिलती है, तो पहले मिश्रित जवाब मिला। लेकिन दोबारा पूछने पर बच्चों ने एक स्वर में कहा कि सिर्फ दाल दी जाती है। इस बीच शिक्षक बच्चों को संकेत कर रहे थे कि वे कहें कि सब्जी और दाल दोनों मिलते हैं। यहां तक कि मंच पर मौजूद कार्यक्रम संचालक ने बच्चों को चुप रहने का इशारा किया। इसके बावजूद बच्चों ने हकीकत बयां कर दी।
मदन दिलावर
मंत्री ने स्वीकार की खामियां, दिए सख्त निर्देश
बच्चों के जवाब सुनने के बाद शिक्षा मंत्री ने मंच से ही कहा कि उन्हें पहले से पता है कि सब्जी नहीं मिलती, जबकि इसके लिए प्रति बच्चे का भुगतान किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मिड डे मील की व्यवस्था सही ढंग से लागू हो और बच्चों को उनका पूरा अधिकार मिले।
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अपने संबोधन के दौरान मंत्री ने बच्चों को स्वदेशी अपनाने का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सामान की खरीद स्वदेशी उत्पादों से ही होनी चाहिए। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी विदेशी सामान खरीदेगा तो उसकी वसूली व्यक्तिगत रूप से की जाएगी। मंत्री ने बच्चों से हाथ उठवाकर यह शपथ भी दिलवाई कि वे स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देंगे।
पहले भी कर चुके हैं औचक निरीक्षण
मिड डे मील की गुणवत्ता को लेकर मंत्री पहले भी औचक निरीक्षण के दौरान सवाल उठा चुके हैं। कई बार बच्चों से असंतोषजनक जवाब सामने आने के बाद उन्होंने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जोधपुर की इस घटना ने एक बार फिर इस योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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