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अनसुनी बातें: जेब में पिस्तौल नहीं शब्दकोश रखते थे भगत सिंह, चाचा की आजादी के लिए खेत में बो दी थी बंदूक

Wed, 23 Mar 2022 01:52 AM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 23 Mar 2022 01:52 AM IST
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Interesting Facts about Life of Shaheed e Azam Bhagat Singh
भगत सिंह। - फोटो : फाइल

शहीद भगत सिंह करिश्माई क्रांतिकारी होने के साथ एक महान बुद्धिजीवी भी थे। आम लोगों में धारणा है और अकसर यह कहा भी जाता है कि भगत सिंह हमेशा अपनी जेब में पिस्तौल रखते थे, लेकिन यह सरासर गलत है। वह अपनी एक जेब में डिक्शनरी और दूसरी में किताब रखते थे। भगत सिंह के दिमाग में किताबी कीड़ा था। किसी दोस्त के घर गए या फिर कहीं बैठे हैं, तो वह तुरंत अपनी जेब से किताब निकालकर पढ़ने लगते थे। इस दौरान अगर अंग्रेजी का कोई शब्द समझ नहीं आया, तो डिक्शनरी निकालकर उसका अर्थ जानते थे। 



अमर उजाला से खास बातचीत में दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से रिटायर प्रोफेसर चमन लाल ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जीवन के कुछ ऐसे तथ्यों का खुलासा किया, जिसे आज तक न किसी ने कहीं पढ़ा होगा और न सुना होगा। प्रोफेसर चमन लाल को उनके भगत सिंह के जीवन पर किए शोध के लिए देश ही नहीं, पूरी दुनिया में जाना जाता है। भगत सिंह से जुड़े तथ्य जुटाने के लिए प्रोफेसर चमन लाल शहीद के खटकड़कलां के पैतृक निवास से लेकर विदेश में बसी उनकी बहन तक पहुंच करने में भी पीछे नहीं रहे।

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भगत सिंह पर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर चमन लाल। - फोटो : फाइल

फिल्में देखने के शौकीन थे भगत सिंह

प्रोफेसर चमन लाल बताते हैं कि छह फुट के लंबे भगत सिंह एक दिलचस्प शख्सियत के मालिक थे, जिन्हें फिल्में देखने का बेहद शौक था। वह अक्सर अपने दोस्त जयदेव के साथ फिल्म देखने जाते थे। एक दिलचस्प किस्से के बारे में प्रोफेसर ने बताया कि एक बार जयदेव ने कहा कि वह नहीं जा सकते, क्योंकि उन्हें एक गंभीर बीमारी डिस्पेप्सिया हो गई है। भगत सिंह ने तुरंत जेब से डिक्शनरी निकाली और अर्थ जाना कि यह तो केवल पेट का हाजमा खराब होने की समस्या भर है। उन्होंने मस्ती में जयदेव के पेट में घूंसा मारा कि तू ऐसे उनके साथ फिल्म देखने जाने से नहीं बच सकता। भगत सिंह टिकट खिड़की पर लंबी लाइन देखकर उछल कूद कर आगे पहुंच जाते थे और टिकट ले आते थे। उन्होंने बताया कि इस किस्से का जिक्र जयदेव के लिखे चार पत्रों से मिलता है। 

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भगत सिंह के बचपन की तस्वीर। - फोटो : फाइल

पूरी नहीं कर पाए थे बीए की पढ़ाई

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत था और आज पाकिस्तान है। पांचवीं तक की पढ़ाई बंगा के गांव के स्कूल में करने के बाद उनका दाखिला लाहौर के डीएवी स्कूल में कराया गया। 1923 में उन्होंने लाहौर के नेशनल कालेज में बीए की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, जिसकी स्थापना दो साल पहले महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के जवाब में लाला लाजपत राय द्वारा की गई थी। हालांकि भगत सिंह अपनी बीए पूरी नहीं कर सके और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के कारण अंग्रेजों की गिरफ्तारी से बचने के लिए अंडरग्राउंड होना पड़ा था।


 

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भगत सिंह। - फोटो : फाइल

15 साल की उम्र में आजादी आंदोलन में हो गए थे शामिल

भगत सिंह का पूरा परिवार स्वतंत्रता सेनानियों का परिवार था और वह अमीर लोग थे। दादा अर्जुन सिंह और चाचा अजीत सिंह भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय थे। उन्होंने लाला लाजपत राय के साथ काम किया था। अजीत सिंह 38 वर्ष तक विदेश में ही रहकर देश की आजादी के लिए लड़ते रहे। सन 1946 में जवाहरलाल नेहरू उन्हें भारत लाए। चाचा सवरन सिंह की तो जेल में बीमारी के कारण 23 साल की छोटी उम्र में मौत हो गई थी। लेकिन भगत सिंह के 15 साल की छोटी उम्र से ही आजादी आंदोलन में शामिल हो जाने से परिवार नाखुश था। इस बात को लेकर जब भी कभी परिवार वालों से विचारों का मतभेद हो जाता था, तो खाना खाने अपने दोस्त रामकिशन के पास चले जाते थे, जिसका अपना एक होटल था। परिवार वालों ने जब उनकी शादी कराना चाही, तो वह पत्र लिखकर घर से चले गए, जिसमें उन्होंने लिखा कि दादा अर्जुन सिंह ने यज्ञोपवीत संस्कार के समय यह प्रण लिया था कि वह उनके बड़े भाई जगत सिंह व भगत सिंह को देश के लिए देते हैं, तो फिर उनकी शादी कराने का फैसला क्यों किया गया है। बाद में परिवार वालों ने जब अपनी यह जिद छोड़ी तो भगत सिंह घर लौटे। इससे उनके अपने देश के प्रति प्रेम व समर्पण की भावना का पता लगता है।  
 

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भगत सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

चार साल की मासूम उम्र में ही जाग गया था देश भक्ति का जज्बा

एक बार ऐसे ही गांव के खेतों में घूमते हुए चार साल के भगत सिंह भी खेत में कुछ बीजने लगे। जब पिता किशन सिंह के करीबी मित्र कांग्रेस कार्यकर्ता मेहता आनंद किशोर ने हंसी में पूछा कि भगत सिंह तुम खेत में क्या बो रहे हो, तो उन्होंने जवाब दिया कि बंदूकें बीज रहा हूं। जब पूछा क्यों, तो कहा ताकि बड़ा होकर उनकी फसल से अंग्रेजों की कैद से देश को आजाद करवा सकूं और चाचा अजीत सिंह को वापस भारत ला सकूं। 

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