{"_id":"605ac5338ebc3e8ceb0edc35","slug":"hola-mohalla-started-at-anandpur-sahib-of-punjab","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"पंजाब : पांच नगाड़ों की गूंज के साथ होला मोहल्ला शुरू, एक बनावटी युद्ध के बाद शुरू हुई थी परंपरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब : पांच नगाड़ों की गूंज के साथ होला मोहल्ला शुरू, एक बनावटी युद्ध के बाद शुरू हुई थी परंपरा
Wed, 24 Mar 2021 10:30 AM IST
निवेदिता वर्मा
शिवशंकर मनीष, संवाद न्यूज एजेंसी, श्री कीरतपुर साहिब (पंजाब)
शिवशंकर मनीष, संवाद न्यूज एजेंसी, श्री कीरतपुर साहिब (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 24 Mar 2021 10:30 AM IST
विज्ञापन
पंजाब में नगाड़े बजाकर होला मोहल्ला की शुरुआत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब के खास पर्वों में शामिल होला मोहल्ला का बुधवार को पांच नगाड़े बजाकर आगाज किया गया। किला आनंदगढ़ साहिब में पांच पुरातनी नगाड़े बजाए गए। यह पर्व 24, 25 और 26 मार्च को श्री कीरतपुर साहिब में मनाया जाएगा। इसके बाद 27, 28 और 29 मार्च को श्री आनंदपुर साहिब में पर्व का आयोजन होगा। 29 मार्च को मोहल्ला निकाला जाएगा। छह दिन तक चलने वाले इस पर्व में लाखों की संख्या में संगत नतमस्तक होगी और मोहल्ला निकालने के दौरान रंग उड़ाया जाएगा और निहंग सिंह घुड़सवारी तथा गतके के जौहर दिखाएंगे। सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की संरचना के बाद होला मोहल्ला का पर्व मनाने की शुरुआत की थी। एक बनावटी युद्ध के बाद इस पर्व की शुरुआत हुई थी। होला मोहल्ला में बिना शारीरिक क्षति पहुंचाए युद्ध के जौहर दिखाए जाते हैं। यहां पढ़ें होला मोहल्ला का इतिहास
पंजाब में होला मोहल्ला शुरू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब में होलगढ़ नामक स्थान पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने होला मोहल्ला की रीति शुरू की। यहां आज किला होलगढ़ साहिब सुशोभित है। भाई काहन सिंह जी नाभा ने ‘गुरमति प्रभाकर’ में होला मोहल्ला के बारे में बताया है कि यह एक बनावटी हमला होता है, जिसमें पैदल और घुड़सवार शस्त्रधारी सिंह दो पार्टियां बनाकर एक खास जगह पर हमला करते हैं।
पंजाब में होला मोहल्ला शुरू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्ष 1757 में गुरु जी ने सिंहों की दो पार्टियां बनाकर एक पार्टी को सफेद वस्त्र पहना दिए और दूसरे को केसरी। फिर गुरु जी ने होलगढ़ पर एक गुट को काबिज करके दूसरे गुट को उन पर हमला करके यह जगह पहली पार्टी के कब्जे में से मुक्त करवाने के लिए कहा। इस दौरान तीर या बंदूक आदि हथियार बरतने की मनाही की गई क्योंकि दोनों तरफ गुरु जी की फौजें ही थीं। आखिरकार केसरी वस्त्रों वाली सेना होलगढ़ पर कब्जा करने में सफल हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब में होला मोहल्ला शुरू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गुरु जी सिखों का यह बनावटी हमला देखकर बहुत खुश हुए और बड़े स्तर पर प्रसाद बनाकर सभी को खिलाया गया तथा खुशियां मनाई गईं। उस दिन से श्री आनंदपुर साहिब का होला मोहल्ला दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखता है।
विज्ञापन
पंजाब में होला मोहल्ला शुरू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
होला मोहल्ला के मौके पर गुलाब के फूलों और गुलाब से बने रंगों की होली खेली जाती है। सिख इतिहास और सिख धर्म में होला मोहल्ला की खास महत्ता है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने होली को होला मोहल्ला में बदला था।