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Mahakaleshwar Temple: ऐसी आरती जिसमे राख से होता है बाबा महाकाल का श्रृंगार, 'श्मशान के साधक' के रूप में पूजा

Thu, 12 Dec 2024 08:52 AM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उदित दीक्षित Updated Thu, 12 Dec 2024 08:52 AM IST
सार

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव को "श्मशान के साधक" के रूप में भी देखा जाता है और भस्म को उनका "श्रृंगार" भी कहा गया है। जिस भस्म से महाकालेश्वर की आरती की जाती है, उसे गाय के गोबर से बने उपले को जलाकर तैयार किया जाता है।  

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Ujjain Mahakaleshwar Temple: Baba Mahakal adorned with ashes in aarti worshipped seeker of crematorium
करें बाबा महाकाल के दर्शन। - फोटो : अमर उजाला

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, भस्म आरती के दौरान भस्म यानी राख से भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग की आरती की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव को "श्मशान के साधक" के रूप में भी देखा जाता है, और भस्म को उनका "श्रृंगार" भी कहा गया है। जिस भस्म से महाकालेश्वर की आरती की जाती है, उसे गाय के गोबर से बने उपले को जलाकर तैयार किया जाता है। किंवदंतियों के मुताबिक, वर्षों पहले महाकालेश्वर की आरती के लिए जिस भस्म का इस्तेमाल किया जाता था, वह श्मशान से लाई जाती थी। हालांकि, मंदिर के मौजूदा पुजारी इस बात को खारिज करते हैं। भस्म आरती की प्रक्रिया करीब दो घंटे चलती है। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाकालेश्वर का पूजन और श्रृंगार किया जाता है। प्रक्रिया के अंत में भगवान शिव को भस्म अर्पित करके उनकी आरती गाई जाती है। इस दौरान घंटे की नाद और महाकाल की भक्ति में डूबे लोगों के सामूहिक स्वर में आरती गाने से माहौल बेहद भक्तिमय हो जाता है।

Ujjain Mahakaleshwar Temple: Baba Mahakal adorned with ashes in aarti worshipped seeker of crematorium
करें बाबा महाकाल के दर्शन। - फोटो : अमर उजाला

जानिए आज कैसे हुई भस्म आरती
श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार सुबह हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भांग, ड्रायफ्रूट और पूजन सामग्री से आकर्षक श्रृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल के मस्तक पर चांदी का मुकुट लगाकर श्रृंगार किया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, वह देखते ही रह गया। भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। जिसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई।

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि मार्गशीष माह शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर गुरुवार को बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया।  इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर "जय श्री महाकाल" का उद्घोष भी किया।

Ujjain Mahakaleshwar Temple: Baba Mahakal adorned with ashes in aarti worshipped seeker of crematorium
करें बाबा महाकाल के दर्शन। - फोटो : अमर उजाला

पायलट बनते ही भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचे रिदम
भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन करने अहमदाबाद गुजरात से रूपा बेन पटेल अपने बेटे रिदम पटेल के साथ दर्शन के लिए पधारीं। रूपा बेन ने बताया कि उनके पुत्र रिदम बचपन से ही पायलट बनना चाहते थे। पांच वर्ष पूर्व वे भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन करने उज्जैन आए थे, तब बेटे ने भगवान श्री महाकाल से पायलट बनने का आशीर्वाद मांगा और इसके लिए लगातार अथक मेहनत की। उन्होंने कहा कि भगवान के आशीर्वाद से रिदम ने अपना प्रशिक्षण पूर्ण किया, एयरबस सहित अन्य विमानों का उड़ान अनुभव के 325 घंटे पूर्ण किए और उन्हें उत्तराखंड राज्य के वीआईपी एविएशन में नियुक्ति प्राप्त हुई। अतः वे नियुक्ति पूर्व भगवान के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर भाव-विभोर हो गए।

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