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MP News: बिछड़ों के मिलन की इमोशनल कहानी; चौदह बरस का 'वनवास' काटकर लौटी मां, 1600 किमी दूर जाकर बेटा लाया साथ
Wed, 13 Aug 2025 05:08 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 13 Aug 2025 05:08 PM IST
सार
14 साल पहले मानसिक स्थिति खराब होने के कारण लापता हुई जन्नतुन नामक महिला चेन्नई के आश्रम में मिली। पहचान के बाद पुलिस और समाज की मदद से उसकी जानकारी परिजनों तक पहुंची। बेटा नईम उसे लेने गया और अब वह परिवार के साथ धनपुरी में सुखपूर्वक रह रही है।
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1600 किमी दूर चेन्नई से मां को घर लाया बेटा
- फोटो : अमर उजाला
चौदह साल पहले घर से लापता हुई महिला आखिरकार अब अपने परिवार के पास पहुंच गई है। अब वह अपने परिवार को पाकर फूले नहीं समा रही है। जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत टॉकीज रोड के पास रहने वाली 40 वर्षीय महिला अचानक घर से कहीं लापता हो गई थी। परिजनों द्वारा उसे काफी समय तक ढूंढने का प्रयास किया गया, लेकिन महिला का कहीं पता नहीं चल सका। वर्षों गुजरने के बाद परिजन भी अब उक्त महिला की घर वापसी की उम्मीद खो चुके थे, लेकिन इस बीच बीते पांच अगस्त 2025 को एक ऐसी खबर लापता महिला के पुत्रों तक पहुंची, जिसने उस खोई हुई उम्मीद को जगा दिया। जब बेटों को पता चला कि करीब 14 साल पहले घर से लापता हुई उन्हें जन्म देने वाली मां सैकड़ों किलोमीटर दूर चेन्नई में किसी महिला आश्रम में सुरक्षित अवस्था में है। यह खबर सुनने के बाद परिजनों की आंखें खुशी से भर आईं।
अपने पोते के साथ जन्नतुम
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के पास आई थी जानकारी
दरअसल बीते 4 अगस्त को धनपुरी थाना में पदस्थ उपनिरीक्षक नागेन्द्र सिंह के मोबाइल में एक अनजान नंबर से कॉल आया, जहां फोन करने वाली महिला ने बताया कि वह चेन्नई स्थित एक महिला आश्रम से बोल रही है। उसने एसआई सिंह को बताया कि उनके आश्रम में एक महिला रह रही है, जो अपना नाम जन्नतुन और बेटों का नाम नईम तथा जाकिर बता रही है। वह शहडोल जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र के टॉकीज रोड में अपना घर होने की बात कह रही है। साथ ही महिला की फोटो भी पुलिसकर्मी को भेजी गई। ताकि उसकी पहचान हो सके।
इसके बाद अगले दिन पांच अगस्त को इसकी जानकारी एसआई नागेन्द्र सिंह द्वारा थाना प्रभारी खेम सिंह पेंद्रो को देते हुए सारी बात बताई गई। थाना प्रभारी द्वारा तत्काल ही महिला के नाम-पते की डिटेल फोटो सहित वक्फ जामा मस्जिद पुरानी बस्ती के सदर माजिद खान से साझा करते हुए महिला की पहचान सामाजिक स्तर में करने में मदद करने के लिए कहा गया। कुछ ही समय में महिला के परिजनों का पता करके खान द्वारा थाना प्रभारी को अवगत करा दिया गया।
ये भी पढ़ें- शराब के नशे में हाई टेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने घंटे समझाया, फिर उतरा
दरअसल बीते 4 अगस्त को धनपुरी थाना में पदस्थ उपनिरीक्षक नागेन्द्र सिंह के मोबाइल में एक अनजान नंबर से कॉल आया, जहां फोन करने वाली महिला ने बताया कि वह चेन्नई स्थित एक महिला आश्रम से बोल रही है। उसने एसआई सिंह को बताया कि उनके आश्रम में एक महिला रह रही है, जो अपना नाम जन्नतुन और बेटों का नाम नईम तथा जाकिर बता रही है। वह शहडोल जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र के टॉकीज रोड में अपना घर होने की बात कह रही है। साथ ही महिला की फोटो भी पुलिसकर्मी को भेजी गई। ताकि उसकी पहचान हो सके।
इसके बाद अगले दिन पांच अगस्त को इसकी जानकारी एसआई नागेन्द्र सिंह द्वारा थाना प्रभारी खेम सिंह पेंद्रो को देते हुए सारी बात बताई गई। थाना प्रभारी द्वारा तत्काल ही महिला के नाम-पते की डिटेल फोटो सहित वक्फ जामा मस्जिद पुरानी बस्ती के सदर माजिद खान से साझा करते हुए महिला की पहचान सामाजिक स्तर में करने में मदद करने के लिए कहा गया। कुछ ही समय में महिला के परिजनों का पता करके खान द्वारा थाना प्रभारी को अवगत करा दिया गया।
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14 साल बाद अपनी बहू से मिली जन्नतुन
- फोटो : अमर उजाला
मां को घर लाया पुत्र
जैसे ही वर्षों से लापता मां के बारे बेटों को जानकारी लगी तो छोटा पुत्र नईम 5 अगस्त को ही अपने एक दोस्त को लेकर बिलासपुर से ट्रेन में सवार होकर अगले दिन दोपहर 1 बजे चेन्नई पहुंच गया। इस दौरान अपनी मां की एक झलक पाने के लिए वह आतुर हो रहा था। करीब तीन घंटे के इंतजार के बाद कागजी कार्यवाही पूर्ण कर आश्रम प्रबन्धन ने पुत्र की शिनाख्त होने के बाद मां को उसके सुपुर्द कर दिया। जो अब अपने घर धनपुरी पहुंच चुकी है। उसके घर में पुत्र नईम के अलावा बड़ा पुत्र जाबिर व दो बहुए तथा उनके बच्चे भी हैं। अब वह अपने परिवार के साथ ख़ुशी ख़ुशी रह रही है। महिला ने बताया कि वह पिछले तीन साल से उक्त आश्रम में रह रही थी, वहां उसका इलाज भी कराया गया। जबकि इससे पहले वह करीब नौ बरस तक जहां तहां भटकती रही।
दिमागी हालत नहीं थी ठीक
पुत्र नईम ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मां की दिमागी हालत ठीक नहीं थी, तब वह घर से लापता हुई थी। घर लौटने के बाद मां ने पुत्र से बताया कि उसे बस इतना याद है कि वह ट्रेन में बैठ पर कहीं पहुंच गई जहां से उसे कुछ लोगों ने चेन्नई स्थित एक महिला आश्रम पहुंच दिया। आश्रम में महिला को धीरे-धीरे कुछ याद आया और वह फिर अपने प्रदेश, जिले व थाने का नाम आश्रम में मौजूद लोगों से बताना शुरू की, जिसके बाद वह वापस घर लौट पाई।
जैसे ही वर्षों से लापता मां के बारे बेटों को जानकारी लगी तो छोटा पुत्र नईम 5 अगस्त को ही अपने एक दोस्त को लेकर बिलासपुर से ट्रेन में सवार होकर अगले दिन दोपहर 1 बजे चेन्नई पहुंच गया। इस दौरान अपनी मां की एक झलक पाने के लिए वह आतुर हो रहा था। करीब तीन घंटे के इंतजार के बाद कागजी कार्यवाही पूर्ण कर आश्रम प्रबन्धन ने पुत्र की शिनाख्त होने के बाद मां को उसके सुपुर्द कर दिया। जो अब अपने घर धनपुरी पहुंच चुकी है। उसके घर में पुत्र नईम के अलावा बड़ा पुत्र जाबिर व दो बहुए तथा उनके बच्चे भी हैं। अब वह अपने परिवार के साथ ख़ुशी ख़ुशी रह रही है। महिला ने बताया कि वह पिछले तीन साल से उक्त आश्रम में रह रही थी, वहां उसका इलाज भी कराया गया। जबकि इससे पहले वह करीब नौ बरस तक जहां तहां भटकती रही।
दिमागी हालत नहीं थी ठीक
पुत्र नईम ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मां की दिमागी हालत ठीक नहीं थी, तब वह घर से लापता हुई थी। घर लौटने के बाद मां ने पुत्र से बताया कि उसे बस इतना याद है कि वह ट्रेन में बैठ पर कहीं पहुंच गई जहां से उसे कुछ लोगों ने चेन्नई स्थित एक महिला आश्रम पहुंच दिया। आश्रम में महिला को धीरे-धीरे कुछ याद आया और वह फिर अपने प्रदेश, जिले व थाने का नाम आश्रम में मौजूद लोगों से बताना शुरू की, जिसके बाद वह वापस घर लौट पाई।
