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Rudraksh Mahotsav: कुबेरेश्वरधाम की ‘ग्रीन शिवरात्रि', करोड़ों ने थामा हरित ध्वज, शिवरात्रि पर बदलाव की हुंकार

Sun, 15 Feb 2026 07:44 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Sun, 15 Feb 2026 07:44 PM IST
सार

सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन ‘ग्रीन शिवरात्रि’ का आह्वान हुआ। पंडित प्रदीप मिश्रा ने ‘आत्मलिंग’ का ज्ञान देते हुए पर्यावरण संरक्षण और सहनशीलता का संदेश दिया। इस दौरान लाखों भक्त मौजूद थे। जहां देखो भीड़ ही भीड़ नजर आ रही थी। 

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Green Shivratri celebrated at Kubereshwar Dham in Sehore on Shivratri, with lakhs of people present.
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में भक्ति, राष्ट्रभक्ति और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘ग्रीन शिवरात्रि’ के संदेश के साथ शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन लाखों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। आत्मलिंग, सहनशीलता और स्वावलंबन पर आधारित संदेशों ने उपस्थित जनसमूह के हृदय को छू लिया।



सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम का वातावरण उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा जब शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन ‘ग्रीन शिवरात्रि’ का शंखनाद हुआ। विठ्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में भक्ति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी सशक्त संदेश दिया गया। पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने कथा प्रारंभ होने से पूर्व ज्योतिर्लिंग वाटिका में 13 पौधों का रोपण कर यह स्पष्ट कर दिया कि शिवभक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति की सेवा से भी जुड़ी है। करोड़ों अनुयायियों ने देश-दुनिया में ‘ग्रीन शिवरात्रि’ मनाकर इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाया।
 

Green Shivratri celebrated at Kubereshwar Dham in Sehore on Shivratri, with lakhs of people present.
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
विशिष्ट अतिथियों का गरिमामयी सान्निध्य
कथा के दूसरे दिन मंच पर देश की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। डॉ. उमाशंकर पाण्डेय, जिन्हें जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है, ने महाराज श्री के कार्यों की तुलना राष्ट्र-ऋषि नानाजी देशमुख से की। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि जिस प्रकार नानाजी देशमुख ने ग्रामीण विकास और समाज निर्माण के लिए जीवन समर्पित किया, उसी प्रकार पंडित प्रदीप मिश्रा जी करोड़ों लोगों को प्रकृति संरक्षण और जल बचाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे संत को ‘पद्म पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाना चाहिए।



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्या ने प्रकृति रक्षा को धर्म रक्षा बताया। उन्होंने उदाहरणों और प्रेरक कथाओं के माध्यम से समझाया कि यदि हम वृक्षों और जल स्रोतों की रक्षा करेंगे, तभी सच्चे अर्थों में धर्म का पालन होगा। पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास के महामंत्री डॉ. यशदेव शास्त्री ने कहा कि महाराज श्री की लोकप्रियता ने स्वदेशी और योग के प्रसार को नई दिशा दी है। पतंजलि परिवार की ओर से उन्होंने उनका अभिनंदन किया।

‘शिव तो श्वांसों में हैं’: आत्मलिंग का दिव्य ज्ञान
कथा के मुख्य आध्यात्मिक बिंदु ने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक झकझोर दिया। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आत्मा को ही लिंग कहते हैं, जिसे ‘आत्मलिंग’ कहा गया है। महादेव हमारी श्वांसों के रूप में हमारे भीतर ही विराजमान हैं। उन्होंने समझाया कि शिव को बाहर ढूंढने की आवश्यकता नहीं है। जब मन शांत होता है और श्वांसों में स्थिरता आती है, तब वही आत्मलिंग का अनुभव होता है। यह संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। स्वयं को पहचानने की साधना।

 
Green Shivratri celebrated at Kubereshwar Dham in Sehore on Shivratri, with lakhs of people present.
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
सहनशीलता ही असली वैभव
कथा वाचक मिश्रा ने शिव चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि महादेव अपने भक्त को पहले सहनशीलता देते हैं, फिर वैभव। उन्होंने कहा कि आज समाज में जो अशांति और असंतोष दिखाई देता है, उसका मूल कारण सहनशीलता की कमी है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि जो शिव की शरण में है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता। यह वाक्य सुनकर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं।

विश्वास का अटूट बंधन
जब भक्त एक लोटा जल लेकर मंदिर जाता है, तो वह केवल जल नहीं बल्कि अपना विश्वास लेकर जाता है। महाराज श्री ने कहा कि शिव पर अडिग विश्वास रखने वाला व्यक्ति जीवन की किसी भी चुनौती से नहीं घबराता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वास वह शक्ति है जो असंभव को संभव बना देती है। कुबेरेश्वर धाम इसी अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प का समर्थन करते हुए महाराज श्री ने स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं पर विश्वास करेंगे और अपने श्रम से आगे बढ़ेंगे, तब कोई भी शक्ति हमें झुका नहीं सकेगी। यह संदेश केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भी प्रेरणा था।

 
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Green Shivratri celebrated at Kubereshwar Dham in Sehore on Shivratri, with lakhs of people present.
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
भक्तों के अनुभव और आस्था का प्रवाह
कथा के दौरान एक नेत्र-विहीन बेटी का पत्र पढ़ा गया, जिसमें उसने कंकड़-शंकर के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की थी। यह पत्र सुनते ही पंडाल में सन्नाटा छा गया और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कुबेरेश्वर धाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों के विश्वास और भावनाओं का केंद्र बन चुका है। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति अपने भीतर एक नई ऊर्जा और आशा लेकर लौटता है।

भक्ति में डूबा समापन
कथा का समापन ‘तेरा शुक्रिया है’ भजन और भव्य महाआरती के साथ हुआ। दीपों की रोशनी, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में प्रकृति संरक्षण, संस्कार और आत्मविश्वास के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कुबेरेश्वर धाम की इस ‘ग्रीन शिवरात्रि’ ने यह संदेश दे दिया कि जब भक्ति के साथ प्रकृति और राष्ट्र का विचार जुड़ जाता है, तब एक नया युग आरंभ होता है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि चेतना का जागरण था,जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

देश सहित विश्वभर में श्रद्धालुओं ने रोपे पौधे
विट्ठलेश समिति के कोआर्डिनेटर विवेक उपाध्याय ने बताया कि ग्रीन शिवरात्रि के अवसर पर देश के साथ विश्वभर में श्रद्धालुओं ने पौधे रोपना सुबह से ही शुरू कर दिया था। समिति के पास श्रद्धालुओं के फोटो और वीडियो प्राप्त हो रहे हैंं। समिति द्वारा डाटा एकत्रित किया जा रहा है। पौधारोपण का शिवरात्रि के अवसर पर लगातार जारी है। एक अनुमान के अनुसार दोपहर दो बजे तक करीब 40 लाख पौधों का रोपण ग्रीन शिवरात्रि के रूप में हो चुका था। 
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