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Sawan Somwar: ईंट-गारे से नहीं बना है यह शिवालय, प्रकृति ने बनाया भगवान भोलेनाथ का आशियाना

Mon, 29 Jul 2024 04:44 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: रवींद्र भजनी Updated Mon, 29 Jul 2024 04:44 PM IST
सार

सागर का यह एक अनूठा शिव मंदिर है। यहां ईट-गारे से नहीं बल्कि पीपल के पेड़ के तने में बना हुआ है। करीब 100 साल पुराने इस मंदिर को प्रकृति ने आकार दिया है। 

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Sawan Somwar Sagar Mehka Kerpani Shiv Temple Peepul Tree
सागर में पीपल के पेड़ के तने में बना है यह अनूठा मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

मध्यप्रदेश के सागर जिले के केसली विकासखंड के ग्राम मेहका केरपानी में एक अनोखा शिवालय है जिसे न मानव ने बनाया है और न ही इसमें ईंट, गारा, सीमेंट या रेत का उपयोग हुआ है। यह भगवान शिव का आशियाना प्रकृति ने स्वयं तैयार किया है। यहां एक विशाल पीपल के पेड़ ने भगवान शिव का अद्भुत मंदिर बनाया है।

यह शिवलिंग और शिवालय अद्वितीय हैं क्योंकि पीपल वृक्ष ने अपनी जड़ों से शिवलिंग के ऊपर मंदिर का आकार दिया है। इसके अंदर भी पीपल की जड़ों से बनी दीवारें मौजूद हैं, जो इसे और भी विशेष बनाती हैं। यह शिवलिंग काफी लंबे समय से यहां स्थापित है और स्थानीय लोगों के बीच आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लोग यहां शिवलिंग की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

Sawan Somwar Sagar Mehka Kerpani Shiv Temple Peepul Tree
सागर में पीपल के पेड़ के तने में बना है यह अनूठा मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

करीब 100 साल पुराना है शिवालय
इस शिवालय की कहानी भी बेहद रोचक है। ग्राम के निवासी हरिशंकर दुबे ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर एक छोटा सा शिवालय बनवाया था। उसी शिवालय के अंदर एक पीपल का पेड़ उग गया, जिसने धीरे-धीरे आकार लेना शुरू किया। यह पीपल का पेड़ इतना विशाल हो गया कि इसने शिवालय का ढांचा ही फाड़ दिया। तब दुबे परिवार ने शिवालय की छत और दीवारें हटा दीं और शिवालय का वर्तमान स्वरूप सामने आया।

Sawan Somwar Sagar Mehka Kerpani Shiv Temple Peepul Tree
सागर में पीपल के पेड़ के तने में बना है यह अनूठा मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

पीपल की जड़ों और तने ने लिया छोटी मढिया का आकार

यह पीपल के पेड़ की जड़ों और तने की अद्भुत कारीगरी है, जिसने शिवलिंग के चारों ओर एक छोटी मढिया जैसा ताना-बाना बुन दिया है। पीपल की जड़ें नीचे से ऊपर तक आकार ले चुकी हैं और लोग अब इस चमत्कार को देखने आते रहते हैं। सावन के महीने में विशेष रूप से सोमवार को दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जुटने लगते हैं। इस अद्वितीय शिवालय को देखने और भगवान भोलेनाथ की आराधना करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। प्रकृति के इस चमत्कार को देखने आने वाले लोग इसे एक अनोखा और पवित्र स्थान मानते हैं।

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