हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पितरों को तर्पण देने की परंपरा सदियों से जारी है। भगवान राम से लेकर राजा इंद्र तक ने अपने पूर्वजों की आत्म शांति और उनका आशीष पाने के लिए पवित्र नदियों के तट पर श्राद्ध कर्म किए हैं। अश्विन महीने के 16 दिन पितृ पक्ष के होते हैं। इन दिनों में धरती पर निवास करने वाले हिन्दू धर्म के लोग अपने पूर्वजों की आत्म शांति और तृप्ति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
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धरम सागर तालाब में अदृश्य रूप से तर्पण देते हैं जुगल किशोर
- फोटो : सोशल मीडिया
भगवान जुगल किशोर करते हैं तर्पण
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में स्थित भगवान जुगल किशोर भी आम लोगों की तरह पितृ पक्ष में अदृश्य रूप से पितरों का तर्पण करते हैं। कहा जाता है कि पन्ना के धरम सागर तालाब में भगवान जुगल किशोर पूरे 16 दिनों तक तर्पण देने जाते हैं। पूरे पितृ पक्ष के दौरान भगवान को सफेद रंग के वस्त्र पहनाएं जाते हैं और वे पितृ पक्ष के नियमों का पालन करते हैं। सफेद वस्त्रों में भगवान के मनोहारी दर्शन भक्तों को साल भर में केवल 16 दिनों तक मिलते हैं। तर्पण की परंपरा मंदिर में सदियों से अनवरत जारी है।
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भगवान जुगल किशोर
- फोटो : सोशल मीडिया
पितृ पक्ष में सफेद वस्त्र धारण करते हैं भगवान
भगवान जुगल किशोर का श्रृंगार सालभर रंग बिरंगे आकर्षक वस्त्रों से किया जाता है लेकिन विशेष तौर पर पितृ पक्ष के दौरान वे इन चमकीले वस्त्रों का त्याग कर श्वेत वस्त्र धारण करते हैं। 16 दिनों तक भगवान जुगल किशोर सफेद वस्त्रों में ही भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर के पुजारी अवध बिहारी का कहना है कि मान्यता है कि इन 16 दिनों तक भगवान जुगल किशोर अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं, इसलिए उन्हें सादे वस्त्र ही पहनाए जाते हैं। ये बहुत पुरानी परंपरा है भगवान श्री कृष्ण के साथ राधाजी भी सफेद साड़ी पहनती हैं।