सावन माह के दूसरे सोमवार को ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव की सवारी धूमधाम और धार्मिक उल्लास के साथ नगर भ्रमण पर निकली। हजारों श्रद्धालु भगवान की एक झलक पाने के लिए मार्ग के दोनों ओर खड़े रहे। पूरे नगर में हर-हर महादेव, बोल बम और भोलेनाथ के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया।
सवारी से पूर्व ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में मंदिर के पंडित-पुजारियों द्वारा भगवान के पंचमुखी रजत मुखौटे की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूजा संपन्न होने के बाद ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी राजा राव पुष्पेंद्र सिंह ने भगवान ओंकारेश्वर को विधिवत पालकी में विराजमान कराया। इसके बाद मंदिर के पुजारी और कर्मचारी भगवान की पालकी को लेकर कोटितीर्थ घाट पहुंचे, जहां मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान का अभिषेक किया गया।
इसी समय ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव की पालकी भी मंदिर से रवाना हुई। दोनों ज्योतिर्लिंगों की पालकी लगभग एक ही समय पर अपने-अपने मंदिरों से निकली और कोटितीर्थ घाट पहुंची। यहां विधि-विधान से अभिषेक और पूजन के बाद भगवान की सवारी मां नर्मदा के पवित्र आंचल में नौका विहार के लिए रवाना हुई।
सुसज्जित नौका में हुआ भगवान का नौका विहार
भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की पालकी को आकर्षक ढंग से सुसज्जित नाव में विराजमान कराया गया। मां नर्मदा के पवित्र जल में नौका द्वारा भगवान की परिक्रमा कराई गई। इस दौरान नदी के दोनों तटों और घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही भगवान की सवारी मंदिरों के सामने नर्मदा के मध्य पहुंची, श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर दर्शन किए और जोरदार जयकारे लगाए। ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’, ‘भोले शंभू भोलेनाथ की जय’ के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। नौका विहार के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। नौका विहार के बाद दोनों पालकियां श्री पंचायती महानिर्मल अखाड़े घाट पर पहुंचीं। यहां से भगवान की सवारी पुनः नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई।
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ओंकारेश्वर को नौका विहार कराया गया।
- फोटो : अमर उजाला
पुष्पवर्षा और आतिशबाजी से हुआ स्वागत
भगवान की पालकी जब नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी तो जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। बालवाड़ी, पुराना बस स्टैंड, मुख्य बाजार, जेपी चौक सहित विभिन्न स्थानों पर लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के सामने भगवान की पालकी के दर्शन किए। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने गुलाब और अन्य पुष्पों की वर्षा कर भगवान का स्वागत किया। महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में पालकी यात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए काफी देर तक मार्ग के दोनों ओर खड़े रहे।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था रही चाक-चौबंद
सावन सोमवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। खंडवा जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी, पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को पालकी यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया था। नगर परिषद के कर्मचारी भी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। भगवान की सवारी जब पुराने बस स्टैंड पहुंची तो प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए नगर में वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया। बाहर से आने वाली बसों को नवीन बस स्टैंड पर ही रोक दिया गया, ताकि पालकी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और नगर में यातायात व्यवस्था बनी रहे।
सावन के दूसरे सोमवार को निकली भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव की सवारी ने एक बार फिर ओंकारेश्वर की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत कर दिया। मां नर्मदा के पवित्र जल में भगवान का नौका विहार और नगर में निकली भव्य पालकी यात्रा के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। देर तक पूरा ओंकारेश्वर हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से गूंजता रहा।
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बाबा ओंकार का अर्धनारीश्वर स्वरूप में शृंगार किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
अर्धनारीश्वर स्वरूप में सजे भगवान ओंकारेश्वर
सावन माह के दूसरे सोमवार को ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। शाम को भगवान ओंकारेश्वर का विशेष शृंगार कर उन्हें अर्धनारीश्वर स्वरूप में सजाया गया। भगवान के इस अद्भुत और मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दिव्य दर्शन कर भावविभोर हो उठे। सावन माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। इसी धार्मिक परंपरा के अंतर्गत सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष शृंगार किया जाता है। मंदिर के गर्भगृह से लेकर परिसर तक फूलों से आकर्षक सजावट की जाती है। सुगंधित फूलों से सजे मंदिर परिसर का वातावरण श्रद्धा और भक्ति से सराबोर दिखाई देता है।
शिव-शक्ति के एकत्व का संदेश देता है अर्धनारीश्वर स्वरूप
भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अर्धनारीश्वर स्वरूप में भगवान शिव और माता पार्वती का एक ही स्वरूप में दर्शन होता है। यह शिव और शक्ति के एकत्व, समानता और सृष्टि के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि शिव तत्व के बिना शक्ति और शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं। इसी भाव को अर्धनारीश्वर स्वरूप में अभिव्यक्त किया जाता है। सावन के पवित्र सोमवार पर भगवान ओंकारेश्वर का यह स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आकर्षण का विशेष केंद्र बना रहा।
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
भगवान के विशेष शृंगार के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को अर्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन हुए, मंदिर परिसर हर-हर महादेव, जय भोलेनाथ और जय ओंकार के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भगवान के मनोहारी स्वरूप को निहारते रहे और कई श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन को अपने जीवन का सौभाग्य बताया। सावन के दूसरे सोमवार को ओंकारेश्वर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। अनेक श्रद्धालुओं ने नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन किए। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा। शाम को विशेष श्रृंगार के बाद वातावरण और भी अधिक भक्तिमय हो गया।