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MP Police Museum: बैतूल में प्रदेश के पहले पुलिस म्यूजियम का शुभारंभ, शहीदों की स्मृतियों को मिला संरक्षण

Mon, 16 May 2022 12:13 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 16 May 2022 12:13 PM IST
सार

बैतूल जिले के रानीपुर में प्रदेश के पहले पुलिस म्यूजियम का शुभारंभ किया गया। शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विष्णु सिंह गोंड ने ब्रिटिश काल में जिस थाने को आग के हवाले कर दिया था। उसी थाने को म्यूजियम में तब्दील किया गया है। 

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Madhya Pradesh: State's first police museum inaugurated in Betul, the memory of martyrs got protection
मध्य प्रदेश का पहला पुलिस म्यूजियम बैतूल में शुरू। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के रानीपुर में रविवार को प्रदेश के पहले पुलिस म्यूजियम का शुभारंभ किया गया। ब्रिटिश हुकूमत के समय शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विष्णु सिंह गोंड ने जिस थाने को आग के हवाले कर दिया था। उसी थाने को म्यूजियम में तब्दील किया गया है। सांसद डीडी उइके, कलेक्टर अमनबीर सिंह बैस, पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद और शहीदों के परिजनों की मौजूदगी में फीता काटकर संग्रहालय का शुभारंभ किया गया।
Madhya Pradesh: State's first police museum inaugurated in Betul, the memory of martyrs got protection
संग्रहालय में शहीदों की स्मृतियां संहेजी गई हैं। - फोटो : अमर उजाला
रानीपुर पुलिस म्यूजियम का शुभारंभ करने के दौरान मुख्य अतिथि सांसद दुर्गादास उइके ने कहा कि यह गौरव की बात है कि बैतूल में प्रदेश का पहला संग्रहालय बना है, जिसमें शहीदों की स्मृतियां सहेजी जाएंगी और उन्हें संरक्षित किया जाएगा। रानीपुर क्षेत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कर्मभूमि रही है। इसलिए इसका महत्व ज्यादा है। पुलिस विभाग ने खासतौर पर एसपी सिमाला प्रसाद ने इस म्यूजियम को बनाने और उसमें संग्रहण की गई सामग्रियां अनुकरणीय है। यह हमारे आने वाली पीढ़ी को हमारे इतिहास की जानकारी देंगी।

वहीं, बैतूल एसपी सिमाला प्रसाद ने बताया कि रानीपुर थाने का पुराना इतिहास है। जब थाने की नई बिल्डिंग बन गई तो इस नए भवन को लेकर सुझाव दिए गए थे, कि इसके इतिहास को सजोकर रखना चाहिए। यहां के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। इसी को लेकर म्यूजियम बनाया गया और इस म्यूजियम में स्वतंत्रता संग्राम के समय जो हथियार उपयोग किए गए थे वह भी रखे गए हैं। इसके अलावा वर्दी भी रखी गई है। पहले कैसी वर्दी पहनी जाती थी? इसकी जानकारी भी लोगों को मिले। पुलिस का 100 साल का रिकार्ड भी जो उपलब्ध हुआ उसे संरक्षित करके रखा गया है। इसमें एक लायब्रेरी भी बनाई गई है, जिसमें पुलिस से संबंधित दस्तावेज हैं और कुछ दस्तावेज अंग्रेजों के समय के भी हैं। यह थाना इसलिए खास है क्योंकि यहां स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई थीं। 
 
 
Madhya Pradesh: State's first police museum inaugurated in Betul, the memory of martyrs got protection
संग्रहालय में डीजी से लेकर आरक्षक तक की वर्दी रखी गई है। - फोटो : सोशल मीडिया
म्यूजियम में इतिहास से जुड़ी जानकारी जुटाने में मदद करने वाले इतिहासकार कमलेश सिंह ने बताया कि संग्रहालय के उद्घाटन के बाद 100 वर्ष पुराना इतिहास जीवित हो गया। एसपी सिमाला प्रसाद का प्रयास सराहनीय है, जिन्होंने इतिहास को पुर्नजीवित करने का प्रयास किया है। रानीपुर थाना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान घटी विभिन्न घटनाओं से जुड़ा है इसलिए इसका विशेष महत्व है और अब आने वाली पीढ़ियों को जिले के इतिहास की बहुत सारी जानकारी मिल सकेगी। 

ग्राम महेंद्रवाड़ी के निवासी और सुभाषचंद्र बोस द्वारा गठित फारवर्ड ब्लाक के सदस्य रहे स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरदार विष्णु सिंह गोंड ने भारत छोड़ो आंदोलन में 22 अगस्त 1942 को गांधीवादियों के साथ मिलकर थाना रानीपुर भवन पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया था। इसके साथ ही थाने में आग लगा दी थी। प्रहार के निशान आज भी मौजूद हैं। इस आंदोलन के पश्चात सरदार विष्णु सिंह को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। म्यूजियम में उनका चित्र लगाकर उनका परिचय भी दिया गया है। साथ ही कुल्हाड़ी भी रखी गई है। 

पुलिस म्यूजियम में डीजी से लेकर आरक्षक तक वर्दी पहने स्टेच्यू रखे गए हैं। इसके अलावा पुलिस विभाग में बजाए जाने वाले वाद्य यंत्र, उपयोग किए जाने वाले हथियार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चित्र और उनका परिचय सहित हथियार, बर्तन, टेलीफोन, टाइप राइटर, लालटेन, महात्मा गांधी के बैतूल आगमन से संबंधित चित्र, अंग्रेजों के समय की एफआईआर, पुलिस के महत्वपूर्ण दस्तावेज सहित स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े तथ्य और पुलिस विभाग से जुड़े तथ्य रखे गए हैं। साथ ही पुलिस विभाग में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों का परिचय सहित चित्र भी म्यूजियम में रखे गये है। 
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लाल थाना बैतूल। - फोटो : अमर उजाला
1895 में शाहपुर थाने की एक चौकी थी। थाने में प्रथम अपराध 1900 में धारा 380 का दर्ज हुआ था। 1900 में रानीपुर थाना पूर्णरूपेण अस्तित्व में आ चुका था। थाने का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1913 में हुआ था। थाने में उपलब्ध ग्राम अपराध पुस्तिका में उल्लेखित सर्वाधिक प्राचीन टीप 1913 की है तथा मुलाहिजा रजिस्ट्रर 1911 से है। रानीपुर थाने का लाल रंग होने के कारण यह लाल थाने के नाम से प्रचलित था। यह थाना जंगल सत्याग्रह का भी साक्षी रहा है। सरदार विष्णु सिंह के नेतृत्व में 300 क्रांतिकारियों ने थाना रानीपुर पर हमला किया था। 2016 तक इसी भवन में थाना संचालित रहा। 


 
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